
मंत्री लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (एमएसएमई) भूपेंद्र सिंह चौधरी ने ब्रिक्स देशों से आए प्रतिनिधियों को किया संबोधित
भारत सरकार के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के तत्वावधान में ब्रिक्स-इंडिया 2026 के अंतर्गत पहले ब्रिक्स एमएसएमई फोरम और तीसरे ब्रिक्स एमएसएमई-वर्किंग ग्रुप की बैठक होटल ताज एंड कन्वेंशन सेंटर में संपन्न
उत्तर प्रदेश का MSME सेक्टर केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सशक्त इंजन है
ODOP से लेकर BRICS सहयोग तक, उत्तर प्रदेश स्थानीय प्रतिभा, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक उद्यमिता को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का कार्य कर रहा है- जनपद प्रभारी मंत्री
उत्तर प्रदेश BRICS देशों के साथ व्यापार, तकनीक, निवेश और नवाचार के नए आयाम स्थापित कर साझा समृद्धि और सतत विकास की दिशा में अग्रसर है
आगरा. 19.06.2026. आज भारत सरकार के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के तत्वावधान में ब्रिक्स-इंडिया 2026 के अंतर्गत पहले ब्रिक्स एमएसएमई फोरम और तीसरे ब्रिक्स एमएसएमई-वर्किंग ग्रुप की बैठक होटल ताज एंड कन्वेंशन सेंटर में संपन्न हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मा.मंत्री, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग तथा जनपद प्रभारी मंत्री श्री भूपेंद्र सिंह चौधरी जी ने कहा कि ऐतिहासिक और वैश्विक पहचान वाले आगरा नगर में BRICS सम्मेलन के अवसर पर आप सभी विशिष्ट अतिथियों, प्रतिनिधियों, उद्योगजगत के सदस्यों, नीति-निर्माताओं, शोध संस्थानों, उद्यमियों तथा विभिन्न देशों से पधारे प्रतिनिधिमंडलों का उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन है। आगरा केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक नहीं, बल्कि शिल्प, हस्तकला, सूक्ष्म उद्यमिता और वैश्विक बाजारों से जुड़ने वाली हमारी परंपरागत आर्थिक शक्ति का भी प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे महत्वपूर्ण मंच पर उत्तर प्रदेश की ओर से उपस्थित होना हमारे लिए गौरव का विषय है। यह सम्मेलन केवल संवाद का अवसर नहीं है, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच परस्पर सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान, बाजार विस्तार, निवेश संवर्धन और साझा समृद्धि के नए मार्ग प्रशस्त करने का सशक्त माध्यम है।
आज देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन, Digital Transformation, Green Manufacturing, स्थानीय उत्पादन और रोजगारोन्मुख विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है, तब MSME क्षेत्र की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। MSME केवल उत्पादन और व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, सामाजिक समावेशन, महिला एवं युवा उद्यमिता, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन तथा क्षेत्रीय संतुलित विकास का आधार है। मा० मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार इस तथ्य को भली-भांति समझते हुए MSME क्षेत्र को राज्य की आर्थिक प्रगति की धुरी मानती है और इसी दृष्टि से औद्योगिक अवसंरचना, वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन, कौशल विकास, बाजार-सुलभता तथा निर्यात संवर्धन पर एकीकृत रूप से कार्य कर रही है।
BRICS विश्व की उन प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच है, जिसने वैश्विक आर्थिक विमर्श में विकासशील देशों की आवाज को सशक्त किया है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में यह समूह भारत में परस्पर सहयोग, संतुलित विकास, बहुपक्षीय संवाद, नवाचार, निवेश, प्रौद्योगिकी साझेदारी, व्यापार विस्तार और सतत विकास जैसे विषयों पर देशों को साथ लाने का कार्य करता है। BRICS का महत्व इस बात में भी निहित है कि यह समूह वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति देता है और ऐसे आर्थिक मॉडल को प्रोत्साहित करता है जिसमें समावेशिता, लचीलापन, स्थानीय क्षमताओं का उपयोग और साझा प्रगति केंद्र में हो। MSME क्षेत्र के संदर्भ में BRICS विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी सदस्य एवं सहयोगी अर्थ व्यवस्थाओं में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम रोजगार, स्थानीय उत्पादन, नवाचार तथा निर्यात प्रतिस्पर्धा के प्रमुख वाहक हैं।
भारत की BRICS अध्यक्षता का केंद्रीय भाव “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” MSME क्षेत्र की प्रकृति से स्वाभाविक रूप से जुड़ा हुआ है। MSME ही वह स्तर है जहाँ स्थानीय प्रतिभा, हस्त कौशल, उद्यमशीलता, नवाचार और बाजार की मांग एक-दूसरे से जुड़ते हैं I BRICS मंच के माध्यम से सदस्य और सहभागी अर्थव्यवस्थाएं न केवल व्यापारिक सहयोग बढा सकती हैं, बल्कि MSME क्लस्टरों के बीच सीधे संपर्क, तकनीकी
हस्तांतरण, गुणवत्तामानकों के आदान-प्रदान, हरित उत्पादन प्रणालियों, डिजिटलीकरण, ई-कॉमर्स और कौशल संवर्धन जैसे क्षेत्रों में भी ठोस साझेदारी विकसित कर सकती हैं। इसी कारण यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ विशाल MSME आधार, विविध उत्पादन संरचना और निर्यात क्षमता BRICS देशों के साथ व्यापक सहयोग की संभावना प्रदान करती है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे अग्रणी MSME अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। राज्य में लगभग 96 लाख MSME इकाइयाँ कार्यरत हैं और यह क्षेत्र लगभग 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश का MSME सेक्टर देश के सभी राज्यों में अग्रणी है।
औद्योगिक आधार को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्या नाथ जी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अपनी एजेंसियों तथा निजी निवेशकों के सहयोग से बड़े पैमाने पर औद्योगिक क्षेत्रों का विकास प्रारंभ किया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से अब तक 588 एकड़ औद्योगिक भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जो पूर्ववर्ती तीन-चार दशकों की तुलना में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके अतिरिक्त, पुराने औद्योगिक आस्थानों का उन्नयन भी किया जा रहा है ताकि MSME इकाइयों को आधारभूत सुविधाओं सहित कार्य करने का बेहतर वातावरण मिल सके। उत्तर प्रदेश की व्यापक सड़क एवं रेल संपर्क व्यवस्था, एक्सप्रेस वे आधारित विकास मॉडल, लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी और औद्योगिक क्लस्टरों के विस्तार ने राज्य को निवेश एवं विनिर्माण के लिए अधिक सक्षम बनाया है। यह वही आधारभूत शक्ति है जिसके कारण राज्य BRICS देशों के लिए एक विश्वसनीय विनिर्माण एवं व्यापारिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।
BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों के साथ उत्तर प्रदेश का व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में BRICS सदस्य देशों को उत्तरप्रदेश का निर्यात 3,938.16 मिलियन अमेरिकी डॉलर तथा BRICS साझेदार देशों को निर्यात 1,429.37 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इस प्रकार BRICS सदस्य एवं साझेदार अर्थव्यवस्थाओं के साथ उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात संबंध 5.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, मिस्र, इंडोनेशिया, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, रूस, वियतनाम, मलेशिया, उज्बेकिस्तान, थाईलैंड और नाइजीरिया जैसे गंतव्यों तक राज्य के उत्पाद पहुँच रहे हैं। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश BRICS क्षेत्र को केवल संभावित बाजार के रूप में नहीं देखता, बल्कि इसे एक स्थापित और विस्तारशील व्यापारिक भूगोल के रूप में स्वीकार करता है।
राज्य के निर्यात पोर्ट फोलियो की विविधता भी इसकी आर्थिक शक्ति को सिद्ध करती है। उत्तर प्रदेश से सड़कवाहन एवं उनके पुर्जे, मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरण, विद्युत मशीनरी, परिधान, ऑर्गेनिक केमिकल्स, चमड़ा, फुटवियर, कालीन, प्लास्टिक, रबरउत्पाद, खाद्यान्न, खाद्य प्रसंस्कृत उत्पाद, रेशम, बहुमूल्य पत्थर तथा औषधीय उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। यह विविधता संकेत करती है कि उत्तर प्रदेश की MSME-आधारित विनिर्माण संरचना केवल पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक उत्पादन, इंजीनियरिंग, प्रसंस्करण, रचनात्मक उद्योग और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से भी जुड़ रही है।
राज्य सरकार ने MSME क्षेत्र को गति देने के लिए वित्तीय सहायता, उद्यम स्थापना, कौशल उन्नयन और बाजार विस्तार के अनेक प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए हैं। MSME इकाइयों को बैंकों के माध्यम से वितरित ऋण की राशि वित्तीय वर्ष 2023-24 में 2.06 लाख करोड़ रुपये थी, जिसे बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2.48 लाख करोड रुपये किया गया। यह लगभग 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है। युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (CMYuva) जैसी अभिनव योजनाप्रारंभ की गई है, जिसके अंतर्गत युवाओं को सूक्ष्म उद्यम्यति करने हेतु गारंटी-मुक्त और ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के तहत प्रति वर्ष 1 लाख नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है तथा 10 वर्षों में 10 लाख नई सूक्ष्म इकाइयाँ स्थापित करने का मिशन निर्धारित है। अब तक 1,39,643 लाभार्थियों को इसका लाभदिया जा चुका है और 4,06,794 रोजगार सृजित हुए हैं।
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अतर्गत वर्ष 2018 से उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से अब तक 37,144 लाभार्थियों को सहायता प्रदान करते हुए 93,663.34 लाख रुपये की मार्जिन मनी वितरित कर अवमुक्त की गई है और 2,97,152 रोजगार सृजित किए गए हैं।
इसी प्रकार प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत 32,936 व्यक्तियों को लाभान्वित करते हुए 1,10,549.91 लाख रुपये की मार्जिन मनी वितरित की गई तथा 2,63,488 रोजगार।
सृजित किए गए हैं। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश में उद्यमिता प्रोत्साहन केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि योजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर वास्तविक रोजगार और इकाई स्थापना को समर्थन दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित पहल’ एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) योजना है, जिसे 24 जनवरी 2018 को प्रारंभ किया गया। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक जनपद के विशिष्ट उत्पाद की पहचान, संरक्षण, संवर्धन और बाजार विस्तार सुनिश्चित करना है। ODOP वित्त पोषण सहायता योजना के अंतर्गत अब तक 20,260 व्यक्तियों को लाभान्वित करते हुए 89,705.43 लाख रुपये की मार्जिन मनी वितरित की गई है तथा 3,16,976 रोजगार सृजित हुए हैं। कौशल उन्नयन एवं टूलकिट योजना के अंतर्गत 1,33,372 व्यक्तियों को प्रशिक्षण एवं टूलकिट प्रदान किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, उत्पादन से विपणन तक मूल्य शृंखला में आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु 24 जनपदों की कुल 30 सामान्य सुविधा केंद्र (CFC) परियोजनाओं को अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई है। ODOP ने परंपरागत कौशल, स्थानीय पहचान और वैश्विक बाजार के बीच एक प्रभावी सेतु का कार्य किया है।
राज्य सरकार पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्प से जुड़े वर्गों के सशक्तीकरण के लिए ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ भी संचालित कर रही है। इस योजना के माध्यम से बढ़ई, दर्जी, नाई, सुनार, लोहार, कुम्हार, टोकरा बुनकर, हलवाई और अन्य पारंपरिक शिल्पकारों को प्रशिक्षण तथा आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि उनके उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हो, श्रम एवं लागत घटे, और कम समय में बेहतर उत्पादन संभव हो सके। अब तक 4,41,824 व्यक्तियों को प्रशिक्षण एवं टूल किट प्रदान किए जा चुके हैं।
इसी प्रकार PLEDGE योजना के अंतर्गत 15 से 50 एकड़ तक के MSME पार्क विकसित करने हेतु 50 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से 1 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज पर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक अलीगढ़, सहारनपुर, कानपुर देहात, हापुड़, सम्भल, झांसी, मेरठ, अमरोहा, सीतापुर, मथुरा, मुरादाबाद और उन्नाव सहित 12 जिलों में PLEDGE पार्क स्वीकृत किए जा चुके हैं।
मानव संसाधन विकास की दृष्टि से भी राज्य सरकार ने MSME क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास विभाग के सहयोग से आगरा, सहारनपुर और सीतापुर जैसे जनपदों में ODOP से संबंधित कारीगरों और परंपरागत शिल्पियों के प्रशिक्षण की पहल की है। इसके अतिरिक्त ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ जैसी नई अवधारणा के माध्यम से प्रत्येक जनपद में एक ऐसी समेकित व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है जहाँ उद्यमियों को परीक्षण सुविधा, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, डिजाइन एवं डिस्प्ले, प्रशिक्षण, वित्तीय संस्थानों और संबंधित सरकारी विभागों की सेवाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकें। इसी प्रकार ‘एक जनपद एक व्यंजन’ (ODOC) जैसी पहल स्थानीय भोजन परंपराओं को आर्थिक पहचान से जोड़ते हुए नए रोजगार अवसरों का सृजन करने की दिशा में एक अभिनव कदम है।
नीति स्तर पर भी उत्तर प्रदेश ने MSME समर्थक वातावरण तैयार किया है। MSME नीति-2022 के अंतर्गत अब तक 173 इकाइयों को 135 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है, जिनके माध्यम से 1,301 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है। राज्य ने उत्तर प्रदेश फुटवियर, लेदर एवंनॉन-लेदर क्षेत्र विकास नीति-2025 लागू की है, जिसके अंतर्गत पूंजीगत सहायता के साथ औद्योगिक भूमि पर 25 से 80 प्रतिशत तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य की नवीन निर्यात नीति 2025-30 निर्यातोन्मुख वातावरण सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बाजार पहुँच बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) का प्रतिवर्ष आयोजन किया जा रहा है। गतवर्ष इस आयोजन में देश-विदेश के 500 से अधिक ट्रेडर्स ने भाग लिया। MSME इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फेयर तथा मंडल स्तर के व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही, उन्हें Flipkart और जैसे ई-कॉमर्स फैथिं से जोड़कर डिजिटल बाजार-सुलभता भी सुनिश्चित की जा रही है। ONDC
उत्तर प्रदेश का अनुभव यह सिद्ध करता है कि जब राज्य सरकार दूरदर्शीनीति, मजबूत आधारभूत संरचना, लक्षित वित्तीय सहायता, कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन और बाजार-सुलभता को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाती है, तब MSME क्षेत्र केवल स्थानीय रोजगार का माध्यम नहीं रहता, बल्कि राज्य की समग्र आर्थिक प्रगति का इंजन बन जाता है। BRICS सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच राज्य के लिए यह अवसर लेकर आते हैं कि वह अपने एमएसएमई, ODOP, पारंपरिक शिल्प, निर्यात क्षमता और निवेशोन्मुख वातावरण को विश्वसमुदाय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें।
उत्तर प्रदेश BRICS देशों के साथ व्यापार, तकनीक, गुणवत्ता मानकीकरण, क्लस्टर-टू-क्लस्टर सहयोग, हरित विनिर्माण, ई-कॉमर्स, कौशल साझेदारी और निर्यात विस्तार के क्षेत्रों में व्यापक सहभागिता के लिए तैयार है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर प्रदेश के MSME, कारीगर, परंपरागत उद्यमी और नवोन्मेषी युवा केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित न रहें, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में आत्मविश्वास के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। इसी भावना के साथ उत्तर प्रदेश BRICS देशों, निवेशकों, क्रेताओं, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और संस्थागत भागीदारों का स्वागत करता है तथा साझा समृद्धि, सहयोग और सतत विकास के पथ पर आगे बढ़ने का आमंत्रण देता है।
गौरतलब है कि उक्त कार्यक्रम का शुभारंभ आज होटल ताज एंड कन्वेंशन सेंटर, में सुबह 10:15 बजे हुआ, केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी जी ने भी संबोधित किया तथा भारत में एमएसएमई सेक्टर की ग्रोथ के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दो दिवसीय बैठक में कल प्रतिनिधिमंडल द्वारा विभिन्न ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण किया जाएगा।


