
आगरा। उप निदेशक, उद्यान विभाग, आगरा मंडल एवं रेलवे अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से आज आलू परिवहन से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता उप निदेशक उद्यान, आगरा मंडल, मुकेश कुमार द्वारा की गई। वैठक में आगरा व मथुरा जिलों के जिला उद्यान अधिकारियों, मंडी के अधिकारियों तथा आगरा मथुरा क्षेत्र के कोल्ड स्टोरेज के मालिकों आलू व्यापारियों तथा वर्तमान में लोडिंग कर रहे आलू व्यापारियों के साथ मीटिंग का आयोजन होटल अतिथिवन, वॉटर वर्क्स, आगरा में संपन्न की गई, रेलवे के माध्यम से किस प्रकार आलू व्यापारी अपने माल को देश के विभिन्न गंतव्य की ओर भेज कर अपना व्यापार बढ़ा सकते हैं तथा रेल राजस्व में भी वृद्धि कर सकते हैं इस बारे में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
बैठक में संजीव जाटव, सहायक वाणिज्य प्रबंधक,आगरा, ऋषिकांत सहायक परिचालन प्रबंधक /आगरा, अनिल कुमार सिंह (उप निदेशक, मंडी समिति, आगरा), श्रीमती अनीता सिंह (DHO/आगरा), मनोज कुमार (DHO/मथुरा), कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष भूपेश अग्रवाल, निलेश चतुर्वेदी (वरिष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक/कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार) सहित एग्रीगेटर्स, किसान, व्यापारी एवं कोल्ड स्टोरेज संचालक उपस्थित रहे।
बैठक में प्रतिभागियों द्वारा रेलवे के माध्यम से आलू परिवहन में आ रही विभिन्न समस्याओं को विस्तार से रखा गया। प्रमुख मुद्दों में रैक उपलब्धता, लोडिंग-अनलोडिंग सुविधा, पारगमन समय, सुरक्षा तथा लागत से संबंधित विषय शामिल रहे। इस अवसर पर ACM/आगरा संजीव जाटव ने अवगत कराया कि वर्तमान में यमुना ब्रिज स्टेशन से उत्तर-पूर्व भारत के विभिन्न स्थानों जैसे CGS, JTTN, AZA एवं SCA तक आलू की लोडिंग सफलतापूर्वक की जा रही है। उन्होंने बताया कि इन गंतव्यों के लिए परिवहन दर ₹1 प्रति किमी प्रति टन से भी कम है, जिससे यह एक किफायती विकल्प बन रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन स्थानों के लिए कुल 32 वैगनों की लोडिंग की जा चुकी है। साथ ही AOM/आगरा ऋषिकांत ने बताया कि नाशवान (Perishable) माल की समयबद्ध ढुलाई सुनिश्चित करने हेतु वैगनों एवं रैक की नियमित मॉनिटरिंग एवं फॉलो-अप किया जा रहा है, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर गंतव्य तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
बैठक के दौरान कुछ ग्राहकों द्वारा यह भी मांग रखी गई कि आलू एक नाशवान वस्तु है, जिसे वर्तमान में बिना वेंटिलेशन वाले ढके (covered) वैगनों में लोड किया जाता है। 4–5 दिनों के पारगमन समय के दौरान ऐसे वैगनों में आलू के खराब होने की संभावना बनी रहती है। अतः इन वैगनों में उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था किए जाने का सुझाव दिया गया, ताकि आलू सुरक्षित रूप से गंतव्य तक पहुंच सके तथा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।इस अवसर पर कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष भूपेश अग्रवाल ने बताया कि आगरा का आलू प्रीमियम गुणवत्ता का है तथा वर्तमान में अधिकांश मात्रा दक्षिण भारत के क्षेत्रों में सड़क मार्ग से भेजी जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि रेलवे द्वारा सुरक्षित एवं विश्वसनीय परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए, तो इस ट्रैफिक को सड़क से रेल माध्यम की ओर स्थानांतरित किया जा सकता है।
साथ ही निलेश चतुर्वेदी (वरिष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक/कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार) ने नेपाल एवं बांग्लादेश जैसे विदेशी बाजारों में आलू निर्यात हेतु उपलब्ध परिवहन सब्सिडी योजनाओं की संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं का लाभ उठाकर किसानों एवं व्यापारियों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकता है तथा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।बैठक में सभी हितधारकों ने सुझाव दिया कि यदि रेलवे द्वारा सस्ती दर, सुरक्षित परिवहन एवं न्यूनतम पारगमन समय सुनिश्चित किया जाए, तो आलू परिवहन के लिए रेल माध्यम को और अधिक आकर्षक बनाया जा सकता है। इससे किसानों, व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा तथा सड़क परिवहन पर निर्भरता भी कम होगी।बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्राप्त सुझावों एवं समस्याओं का संकलन कर रेलवे प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके और क्षेत्र से आलू की रेल द्वारा ढुलाई को बढ़ावा दिया जा सके।


