
पूजा पंडित विनय शर्मा महाराज और पंडित पवन शर्मा के द्वारा पूजा भंडार मन्दिर बलकेश्वर मे पूजा करायी
आगरा। थद्डी(बसौड़ा/ठंडा खाना ) से एक दिन पहले शाम को चुल्हे को साफ एवं पवित्र कर उस चूल्हे पर मीठा लोला (मीठी रोटी) , कोकी एवं अनेकों प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। रात को सोने से पूर्व चुल्हे पर जल छिड़क कर हाथ जोड़कर पूजा की जाती हे। इस तरह चुल्हे ठंडा किया जाता हे।
कई हजारों वर्षा पहले सिंध प्रांत में मोहन-जोदड़ो सभ्यता जहां पर सिंधी समाज के लोग अधिक संख्या में रहते थे, उस समय वहां पर छोटी माता (चिकन पॉक्स) की बीमारी ने बहुत ही खतरनाक बीमारी का रूप ले लिया था, तभी वहां पर धरती से शीतला माता की मूर्ति निकली थी, जिनको वहां के विद्वान साधु-सन्तों ने पहचान कर उनकी पूजा पद्धति एवं विधि विधान बताते हुये बोला की शीतला माता को प्रसन्न रखने से वह हम सबको इस बीमारी से मुक्त करवा देंगी। सिंधी समाज के लोगों ने जल्द ही बीमारियों से छुटकारा पाया और तभी से यह त्योहार सिंधी समाज मनाते हुए आ रहा है.
ऐसी मान्यता है कि इस त्योहार के दिन ठंडा भोजन ग्रहण करने पर वर्ष भर घर में सुख शांति बनी रहती है।
थद्डी वाले दिन औरतें नहाते वक़्त अपने सिर पर सात लौटी पानी डालकर नहाती है और फिर भीगे हुए काले चने और मीठी रोटी को ब्राह्ममण के यहाँ ले जाकर पूजा करती है और फ़िर घर आकर (अखड़ी) के ऊपर टीका और मक्खन लगाकर घर मन्दिर श्री गिरधर गोपाल मंदिर काला महल मे सभी लोग ने आज सुबह पूजा की और फिर सारा दिन बिना चूल्हा जलाएं 1 दिन पहले बनाए हुए खाने को खाते हैं और इससे यह संदेश जाता है कि अब से हम बासेड़ा (ठंडा) खाना खा सकते है पूजा करने वालो मे लक्ष्मी जेठवानी, भाविका दियालानी, रशिम बुधरानी, पूजा सेवकानी पूजा शर्मा, नैना जेठवानी, सिद्धि आयलानी, कामनी शर्मा, जिया बत्रा, विकास जेठवानी, सूर्य प्रकाश, मेघराज दियालानी, किशोर बुधरानी,ईश्वर सेवकानी, रोहित आयलानी, कुनाल जेठवानी, पवन बत्रा, मनोज थारानी आदि


