ताजनगरी आगरा कलेक्ट्रेट में सोमवार को दो पीड़ित युवकों ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने हर किसी को झकझोर दिया। व्हीलचेयर पर पहुंचे जोगेंद्र और उनके साथी जयप्रकाश ने खुद को ‘कॉकरोच’ बताकर प्रशासन के सामने न्याय की गुहार लगाई। एक युवक ने गलत मेडिकल रिपोर्ट से जिंदगी बर्बाद होने का आरोप लगाया, तो दूसरे ने अपनी बहन को गलत टीबी इलाज देकर मानसिक रूप से बीमार बना देने का दावा किया। दोनों का कहना है कि सालों से अधिकारियों के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला।

आगरा कलेक्ट्रेट में छलका दर्द- गरीब की औकात कॉकरोच से ज्यादा नहीं
आगरा। ताजनगरी आगरा के जिला मुख्यालय पर मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया। व्हीलचेयर पर बैठा एक युवक… शरीर पर शिकायतों की लंबी लड़ियां… सीने पर चिपका पोस्टर — “मैं हूं कॉकरोच”। उसके साथ खड़ा दूसरा युवक भी खुद को “कॉकरोच” बताकर प्रशासन के सामने इंसाफ मांग रहा था।
दोनों की आंखों में गुस्सा कम और बेबसी ज्यादा थी। उनका कहना था कि जब सिस्टम गरीब इंसान को इंसान समझने को तैयार नहीं, तो फिर इंसानों की तरह गुहार लगाने का क्या फायदा।
मजदूरी ने पैर छीने, सिस्टम ने जिंदगी
मिढ़ाकुर निवासी जोगेंद्र कभी कमर्शियल वाहन चलाकर परिवार चलाते थे। आरोप है कि एक निजी स्कूल संचालक ने उनसे जबरन बेलदारी कराई। इसी दौरान छत से गिरा भारी पत्थर उनकी रीढ़ की हड्डी पर आ गिरा। परिवार की दुनिया उसी पल बदल गई। स्कूल संचालक के कहने पर उन्हें खेरिया मोड़ स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। ऑपरेशन हुआ, लेकिन जोगेंद्र हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर आ गए। जोगेंद्र का आरोप है कि जब उन्होंने जिलाधिकारी से शिकायत की, तो निष्पक्ष जांच की जगह कागजों में ही पूरा मामला बदल दिया गया।
“घर बैठे बना दी रिपोर्ट, कहा- पहले से था लकवा”
पीड़ित का आरोप है कि सीएमओ कार्यालय ने बिना शारीरिक जांच किए डाक से रिपोर्ट भेज दी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि जोगेंद्र को पहले से लकवा था और वह घर पर गिरकर घायल हुए थे। इस रिपोर्ट ने न सिर्फ उनकी शिकायत कमजोर कर दी, बल्कि जिंदगी भी तोड़ दी।
आर्थिक तंगी, इलाज का अभाव और मानसिक तनाव के बीच उनकी पत्नी भी उन्हें छोड़कर चली गई। आज हालत यह है कि उनके दोनों पैरों में गंभीर संक्रमण फैल चुका है और वह व्हीलचेयर पर बैठकर कलेक्ट्रेट में न्याय की भीख मांग रहे हैं।
“टीबी थी ही नहीं, फिर भी दे दी हैवी डोज”
दूसरे पीड़ित जयप्रकाश ने सौफुटा रोड स्थित ‘श्रीजी हॉस्पिटल’ पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि डॉक्टरों ने उनकी बहन कविता को बिना टीबी हुए ही टीबी की भारी दवाएं दे दीं। जब हालत बिगड़ी तो परिवार उसे Sarojini Naidu Medical College समेत शहर के कई बड़े अस्पतालों में लेकर गया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि युवती को टीबी थी ही नहीं। जयप्रकाश का आरोप है कि गलत इलाज के कारण उनकी बहन मानसिक संतुलन खो चुकी है।
जांच में डॉक्टर दोषी, फिर भी कार्रवाई नहीं?
जयप्रकाश का दावा है कि सीएमओ की जांच कमेटी ने डॉक्टरों को दोषी माना था, लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई। उनका आरोप है कि रसूख और पहुंच के चलते फाइल दबा दी गई। अब हालत यह है कि शिकायतकर्ता को ही थाने और दफ्तरों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं, जबकि आरोपी खुलेआम धमकियां दे रहे हैं।
कॉकरोच बनना पड़ा, क्योंकि गरीब की सुनवाई नहीं
जब प्रदर्शन कर रहे युवकों से पूछा गया कि उन्होंने खुद को “कॉकरोच” क्यों कहा, तो उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल से दफ्तर-दफ्तर भटक रहे हैं। गरीब आदमी की कोई सुनवाई नहीं। रसूखदारों के सामने हमारी हैसियत कीड़े-मकोड़ों जैसी हो गई है। इसलिए आज कॉकरोच बनकर आए हैं, ताकि शायद सिस्टम को हमारी हालत दिखाई दे जाए।
कलेक्ट्रेट में मचा हड़कंप, अधिकारियों के भी छूटे पसीने
इस अनोखे प्रदर्शन ने जिला मुख्यालय में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चौंका दिया। लोग रुक-रुककर दोनों की कहानी सुनते रहे। कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इस दर्दनाक प्रदर्शन के बाद प्रशासन इन पीड़ितों की फरियाद सुनेगा, या फिर यह आवाज भी फाइलों और दफ्तरों के बीच कहीं दबकर रह जाएगी।


