
भागवत के मार्ग पर चलने से कष्ट होते हैं दूर, भगवान नाम ही जीवन रूपी नैया को पार लगाने का एकमात्र सहारा
आगरा। जीवन रूपी नैया को भवसागर से पार करने के लिए भगवान का नाम ही एकमात्र सहारा है। वर्तमान समय में ऐसा कोई मनुष्य नहीं है जो किसी न किसी दुख से पीड़ित न हो, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि ईश्वर स्मरण को त्याग दिया जाए। यदि मनुष्य श्रीमद्भागवत के अनुसार अपने जीवन का कार्यान्वयन करे तो कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं सुखमय बन जाता है। यह उद्गार श्री बुर्जीवाला मंदिर श्रीमद्भागवत कथा के दौरान व्यासपीठ से पवन शास्त्री महाराज ने व्यक्त किए।
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान सती चरित्र, ध्रुव चरित्र एवं प्रह्लाद चरित्र के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथावाचक पवन शास्त्री महाराज ने सती चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव की आज्ञा की अवहेलना कर पिता के घर जाना सती के लिए अपमान का कारण बना, जिससे आहत होकर उन्होंने स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया। कथा के दौरान भगवान विष्णु के वामन अवतार की दिव्य झांकी प्रस्तुत की गई, जिसमें बाल ब्राह्मण स्वरूप में भगवान विष्णु कमंडल, छत्र और दंड धारण किए हुए श्रद्धालुओं का मन मोहते नजर आए। कथावाचन के बीच पूरा प्रांगण ‘राधे-राधे गोविन्द राधे’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। कथा विश्राम पर श्रद्धालुओ ने महापुराण की आरती की |
*मुख्य यजमान विनोद अग्रवाल ने बताया कि कथा के चौथे दिन समुद्र मंथन, राम जन्म एवं कृष्ण नंदोत्सव प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। पुरे मंदिर को आकर्षक सजावट से नंदोत्सव के लिए सजाया जायेगा। श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन प्रतिदिन शाम 3बजे से शाम 6 बजे तक किया जा रहा है। इस अवसर पर गिरिराज अग्रवाल, आयोजक विनोद अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, मनोज नौतनानी आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।


