मंदिरों के बारे में पुस्तक प्रकाशन, समय की आवश्यकता, कमला नगर के श्री लक्ष्मी नारायन मंदिर के 40 वे स्थापना दिवस पर स्मारिका का विमोचन

Press Release उत्तर प्रदेश

मंदिर के इतिहास के साथ-साथ सनातन धर्म पर महत्वपूर्ण आलेख

आगराः मंदिर ही सनातन धर्म के मूल हैं। मंदिरों से जहां भक्ति का संदेश दिया जाता है, वहीं सत्य सनातन धर्म की धारा प्रवाहित होती है। युवा पीढ़ी को संस्कारित करने का काम देवालयों में किया जाता है। इसलिए इन मंदिरों के बारे में पुस्तकें अवश्य प्रकाशित कराएं। तभी नई पीढ़ी मदिरों के प्रमाणिक इतिहास से अवगत हो सकेगी।
यह विचार वक्ताओं ने रविवार को कमला नगर के ई ब्लाक स्थित लक्ष्मीनारायन मंदिर में आयोजित स्मारिका- ‘शांताकारं भुंजगशयनम’ के विमोचन समारोह में व्यक्त किये। मंदिर का आज 40 वां स्थापना दिवस भी मनाया गया, जिसमें हवन, पूजन आदि भी हुए। मुख्य अतिथि समाजसेवी कांता प्रसाद अग्रवाल थे। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में आध्यात्म के प्रति तेजी से भावना बढ़ी है।
मंदिर की स्मारिका के मार्गदर्शक आदर्श नंदन गुप्ता ने उन्होंने कहा कि समाज को मार्ग दिखाने का काम करता है धर्म। धर्म स्थल होते हैं देवालय। जिनके संरक्षण और प्रचार की महती आवश्यकता है। समारोह की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने की।
मंदिर के उपासक आचार्य विष्णुदत्त शास्त्री विशिष्ट अतिथि थे। स्मारिका के संपादकद्वय राजकुमार अग्रवाल व जेपी शर्मा ने बताया कि स्मारिका- ‘शांताकारं भुंजगशयनम’ रंगीन 140 पृष्ठों की है। इसमें मंदिर के इतिहास और परंपरा के अलावा सनातन धर्म के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी के आलेख प्रकाशित किये गए हैं। इसमें वरिष्ठ पत्रकार आदर्श नंदन गुप्ता का मार्ग निर्देशन भी मिला है।
इस अवसर पर मुकेश कुमार अग्रवाल, के.जी.अग्रवाल, रंगेश त्यागी, आर.पी. अग्रवाल, महेशचंद अग्रवाल, प्रेम सागर अग्रवाल, महावीर प्रसाद, गोपाल प्रसाद, सी.ए.राम कुमार अनुपम अग्रवाल और अन्य मौजूद रहे।

 

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