राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर 30वीं निःशुल्क इण्टर हाउस ज़िला ताइक्वान्डो प्रतियोगिता में स्वामी बाग स्कूल ओवरआल विजेता, जीते 35 स्वर्ण,10 रजत व 08 कांस्य पदक सहित कुल 53 पदक

SPORTS उत्तर प्रदेश

आगरा। जिला ताइक्वान्डो संघ,आगरा के कोषाध्यक्ष (एडवोकेट) योगेन्द्र वार्ष्णेय की सूचनानुसार आगरा के स्वामी बाग हायर सेकेंड्री स्कूल,दयालबाग के प्रांगण में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर एक दिवसीय निःशुल्क 30वीं इण्टर हाउस ज़िला ताइक्वान्डो प्रतियोगिता का आयोजन किया गया,जिसमें बालक एवं बालिकाओ के फाइट एवं पूमसे के रोमांचक मुकाबले खेले गए । 30वीं इण्टर हाउस ज़िला ताइक्वान्डो प्रतियोगिता की विजेता टीमें इस प्रकार रहींः-
फाइट एवं पूमसे बालक एवं बालिका दोनों वर्गों में स्वामी बाग की टीम 35 स्वर्ण,10 रजत व 08 कांस्य पदक सहित कुल 53 पदक के साथ ओवरऑल विजेता रहा ।
ओवर आल उपविजेता नील फ्लोरेंस ताइक्वांडो एकेडमी रही।

उद्घाटन एवं पुरस्कार वितरण जिला ताइक्वान्डो संघ,आगरा की सी ई ओ संगीता शर्मा द्वारा किया गया । धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय शिक्षक कौशलेश पांडेय द्वारा किया गया । जबकि प्रतियोगिता एवं कार्यक्रम का संचालन जिला ताइक्वान्डो संघ,आगरा महासचिव मास्टर पंकज शर्मा द्वारा किया गया। प्रतियोगिता सब जूनियर, कैडेट,जूनियर एवं सीनियर बालक एवं बालिका फाइट एवं पूमसे वर्ग में खेली गई।

आज के स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी इस प्रकार हैं:-

बालक फाइट स्वर्ण पदक विजेता:-
सुदर्शन देबनाथ,इशांत कुमार,माधव गौतम,सूर्यांश रस्तोगी,शिवाय बघेल,वात्सल्य दीक्षित,आदित्य सिंह,लक्ष्य गौतम,जतिन बघेल,आर्यवीर सिंह,ओजस वर्मा,शिवम् उप्रेती,अभिमन्यु सिंह चौहान, महेंद्र प्रताप चौहान,एवं नवीन कुमार ।

बालिका फाइट स्वर्ण पदक विजेता:- गौरांशी कटारा,रेजल बघेल,परी माथुर,तनिष्का सिंह,पलक सिंह,शब्दा मेहता,दृष्टि सिंह, निशिका सिंह,अनिका गुप्ता एवं मन्नत सत्संगी ।

पूमसे बालिका स्वर्ण पदक विजेता :-काव्या पांडेय,आरिका शुक्ला,एंजल सिंह,लाव्या मगन,इक्षा सत्संगी,दर्शनी पोरवाल,पर्णिका वार्ष्णेय, प्रार्थना सत्संगी, देविका जुरेल,नविका तिवारी एवं महिमा जुरेल ।

पूमसे बालक स्वर्ण पदक विजेता:- प्रदीप गौर,मितुल सिंघल,रियांश तिवारी,अहान मिश्रा,निवान अग्रवाल,अक्षुत महादेव,उद्धव शर्मा,राम अविकल्प दीक्षित एवं सोहंग भटनागर।

मास्टर पंकज शर्मा द्वारा सभी उपस्थितों को हॉकी के महान जादूगर ओलंपियन एवं मेज़र ध्यानचंद जी के बारे में विस्तार से जानकारी दी साथ ही बताया कि उनके जन्म दिवस 29 अगस्त को भारत वर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है ।

यह दिन खेलों के प्रति जागरूकता और फिटनेस को बढ़ावा देता है।हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में, जीवन में शारीरिक गतिविधियों और खेलों के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं, राष्ट्रीय खेल दिवस एक ऐसा अवसर है जब देश के प्रतिभाशाली एथलीटों को राजीव गांधी खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार, ध्यान चंद पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसी मान्यताओं से सम्मानित किया जाता है।इस दिन राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में, भारत के राष्ट्रपति इन पुरस्कारों को देते हैं।
इसकी शुरुआत आधिकारिक तौर पर वर्ष 2012 में हुई थी।

ध्यान चंद कौन थे ?

29 अगस्त, 1905 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) में जन्मे ध्यान चंद सिंह ने स्वतंत्रता से पहले शानदार फॉर्म दिखाया। द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के वर्षों में खेल में हावी रहने वाली भारतीय हॉकी टीम के स्टार खिलाड़ी, ध्यान चंद सिंह ने 1928, 1932 और 1936 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भारत को ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने और अपनी पहली हैट्रिक पूरी करने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ब्रिटिश भारतीय सेना की रेजिमेंटल टीम के साथ अपने हॉकी करियर की शुरुआत करते हुए, एक युवा ध्यान सिंह एक विशेष प्रतिभा थे। लेकिन जिस चीज ने आगे पहुंचाया, वो था उनके हॉकी के प्रति समर्पण। रेजिमेंटल कर्तव्यों में दिन बिताने के साथ, ध्यान सिंह चांदनी रात में अपनी हॉकी का अभ्यास करते थे, जिसके कारण उन्हें ध्यान चंद नाम दिया गया।

वो आने वाले वर्षों में तेजी से आगे बढ़े, विभिन्न इंटर-आर्मी मैचों के साथ अपनी टीमों की मदद करने लगे, और जल्द ही 1928 के ओलंपिक के लिए भारतीय हॉकी टीम में शामिल हो गए। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा और हॉकी के कमाल से दुनिया पर राज किया, जिसने उन्हें ‘हॉकी जादूगर’ और ‘द मैजिशियन’ बना दिया।

हॉकी के इस दिग्गज का करियर 1926 से 1948 तक चला और भारत के लिए 185 मैचों का प्रतिनिधित्व करने के बाद सबसे महान हॉकी खिलाड़ियों में से एक बनकर उन्होंने अपने करियर को अंजाम दिया। जब वे 1956 में भारतीय सेना की पंजाब रेजिमेंट में एक मेजर के पद से रिटायर हुए, तो भारत सरकार ने उसी वर्ष पद्म भूषण से सम्मानित किया। जोकि तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है।

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