राज्यपाल माननीय आनंदीबेन पटेल बोलीं—सिर्फ सहभागिता से नहीं चलेगा काम, आत्ममूल्यांकन कर नवाचार के जरिए विद्यार्थियों को बनाएं उत्कृष्ट नागरिक

Press Release उत्तर प्रदेश

दो दिवसीय उत्तरी क्षेत्रीय ‘नेशनल कॉन्क्लेव-2026’ का हुआ समापन

आगरा .28.10.2026. राष्ट्रीय ‘पुष्टि’ और ‘मित्र’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर, नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षाविदों ने साझा किए अनुभव; माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी रखे विचार
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के खंदारी परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद परिसर के जयप्रकाश नारायण सभागार में आयोजित दो दिवसीय उत्तरी क्षेत्रीय ‘नेशनल कॉन्क्लेव-2026’ का गुरुवार को समापन हो गया। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई), भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित इस सम्मेलन में शिक्षकों के व्यावसायिक विकास, मेंटरिंग व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।
मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की माननीय कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल जी ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे केवल कार्यक्रमों में सहभागिता तक सीमित न रहें, बल्कि आत्ममूल्यांकन के आधार पर अपनी कार्यशैली में सुधार करें और नवाचारयुक्त शिक्षण पद्धतियों को अपनाकर विद्यार्थियों को उत्कृष्ट नागरिक बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि सशक्त, संस्कारवान, चरित्रवान और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण करना होना चाहिए।

मातृभाषा में शिक्षा से निखरेगी बच्चों की प्रतिभा
माननीय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में मातृभाषा में शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है, लेकिन व्यवहार में आज भी बच्चों को अंग्रेजी में बोलने के लिए अधिक प्रेरित किया जाता है। दूसरी भाषाओं का ज्ञान देना जरूरी है, मगर बच्चों को पहले अपनी भाषा को समझने, बोलने और उसमें सोचने के अवसर मिलने चाहिए। इससे वे अपनी बौद्धिक क्षमता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में उनके मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है। इसलिए उन्हें मातृभाषा के माध्यम से सीखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय एवं एकरूपता स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि विद्यार्थियों की प्रतिभा प्रभावित न हो।
राज्यपाल ने सरकार, मंत्रियों, अधिकारियों और शिक्षाविदों से ऐसी व्यवस्था विकसित करने की अपील की, जिसमें बच्चों को सीखने के अधिकाधिक अवसर मिलें। उन्होंने विद्यार्थियों को देशाटन कराने पर भी जोर दिया। कहा कि बच्चे जब विभिन्न स्थानों को देखकर, महसूस करके और प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करके सीखते हैं, तो उनकी समझ अधिक व्यापक होती है।

‘पुष्टि’ और ‘मित्र’ से मजबूत होगा शिक्षक विकास का तंत्र
सम्मेलन का मुख्य विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षकों के व्यावसायिक सशक्तीकरण के लिए ‘पुष्टि’ (PUSHTI-NPST) और ‘मित्र’ (MITRA-NMM) को देशव्यापी स्तर पर लागू करने के लिए हितधारकों की क्षमता निर्माण रहा।
एनसीटीई के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था की व्यापकता का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में लगभग 14.67 लाख स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और 25 करोड़ विद्यार्थी हैं। उन्होंने कहा कि इतनी विशाल शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों के व्यावसायिक मानकों को मजबूत करना और एक प्रभावी मेंटरिंग तंत्र विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने ‘पुष्टि’ के अंतर्गत राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानकों (NPST) की त्रि-स्तरीय व्यवस्था और ‘मित्र’ के अंतर्गत राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (NMM) की सहयोगात्मक मार्गदर्शन प्रणाली के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों से शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास, अनुभवों के आदान-प्रदान और बेहतर शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा।
प्रो. अरोड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तरी क्षेत्र के नौ राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी स्थानीय भाषा, संस्कृति और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप इन पहलों को लागू करने में लचीलापन दिया गया है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित उद्देश्यों के साथ स्थानीय आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जा सकेगा।

सीखी गई बातों को विद्यार्थियों तक पहुंचाना जरूरी: प्रो. आशु रानी
विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी जी ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सीखने, अनुभव साझा करने और प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में उतारने का अवसर है। यहां सीखी गई बातों को आत्मसात कर विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा, तभी शिक्षा के क्षेत्र में वास्तविक बदलाव दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि कुलाधिपति के मार्गदर्शन में शिक्षकों को एक आदर्श शिक्षक के रूप में कार्य करने और बेहतर कार्यशैली सीखने का अवसर मिलता है। शिक्षकों को केवल मेंटर की भूमिका में ही नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्वयं भी दूसरों से सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए। अपने से बेहतर लोगों से जो कुछ सीखने को मिले, उसे ग्रहण कर दूसरों तक पहुंचाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें। कुलपति ने कहा कि केवल पंजीकरण कराने या किसी कार्यक्रम में भाग लेने से उद्देश्य पूरा नहीं होता। किसी भी पहल की सफलता इस बात से तय होगी कि उससे प्राप्त ज्ञान और संसाधनों का लाभ वास्तविक हितधारकों एवं विद्यार्थियों तक कितना पहुंचता है। सक्षम शिक्षक ही समर्थ भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

शिक्षा को संस्कारों से जोड़ना जरूरी: योगेंद्र उपाध्याय
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों की सहभागिता को ‘लघु भारत’ का स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों से आए शिक्षाविद शिक्षा के महायज्ञ में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने स्वयं को भी इस संवाद में एक मेंटी बताते हुए कहा कि यहां उपस्थित लोगों से कुछ न कुछ सीखने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में होने वाला मंथन तभी सार्थक होगा, जब इसके निष्कर्ष विद्यालयों तक पहुंचेंगे और विद्यार्थियों को उनका लाभ मिलेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब उसका प्रभाव देश के प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंचेगा।
गुरु चाणक्य और चंद्रगुप्त का उदाहरण देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को संस्कारों से जोड़ना बेहद आवश्यक है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों को विवेकशील बनाए, उनमें सही-गलत का अंतर समझने की क्षमता विकसित करे और उन्हें आत्मनिर्भर नागरिक बनने के लिए प्रेरित करे।
उन्होंने ‘पुष्टि’ और ‘मित्र’ जैसी राष्ट्रीय पहलों को विकसित करने तथा लागू करने के लिए एनसीटीई के प्रयासों की सराहना की। कहा कि इन पहलों का प्रभावी क्रियान्वयन ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक हो सकता है।
कार्यक्रम में संस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. चांद किरण सलूजा ने भी अपने विचार रखे।
इस दो दिवसीय सम्मेलन का प्रभावशाली मंच संचालन किया इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षक डॉ प्रमोद कुमार एवं रिसर्च स्कॉलर मनीषा यादव ने. तकनीकी सत्रों में डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप का प्रशिक्षण
दो दिवसीय सम्मेलन में ‘मित्र’ (MITRA-NMM) और ‘पुष्टि’ (PUSHTI-NPST) के क्रियान्वयन पर केंद्रित कई तकनीकी एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। इनमें प्रतिभागियों को दोनों पहलों की अवधारणा, उद्देश्य, वैचारिक आधार, कार्ययोजना और देशव्यापी क्रियान्वयन की रणनीति से परिचित कराया गया।
एनसीटीई की टीम ने ‘मित्र’ हैंडबुक का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया और इसके डिजिटल पोर्टल का लाइव प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को पोर्टल के उपयोग, मेंटरिंग प्रक्रिया और क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
दूसरे दिन के सत्र ‘पुष्टि’ पर केंद्रित रहे। इनमें राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानकों की परिकल्पना, वैचारिक ढांचे और कार्यान्वयन प्रक्रिया पर चर्चा की गई। एनसीटीई की टीम ने ‘पुष्टि’ डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप का भी लाइव डेमो दिया।
इन सत्रों में प्रतिभागियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। उन्होंने सवाल पूछे, सुझाव दिए और अपने अनुभव साझा किए। इन गतिविधियों से शिक्षकों के व्यावसायिक विकास और मेंटरिंग व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करने की चुनौतियों एवं संभावनाओं को समझने में मदद मिली।

नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता
सम्मेलन में चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें स्कूली शिक्षा विभागों, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET), राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों तथा केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और विभिन्न राज्य बोर्डों के प्रतिनिधि शामिल रहे। मंच संचालन डॉ. प्रमोद कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रो. मनु प्रताप सिंह, निदेशक आईईटी एवं विश्वविद्यालय समन्वयक, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, एनटीए के सलाहकार मुकुंद कुमार झा, प्रो. आशीष श्रीवास्तव सहित अन्य शिक्षाविद एवं अधिकारी मौजूद रहे।

कुलाधिपति ने किया विश्वविद्यालय के कैंपस का निरीक्षण
दो दिन तक कार्यक्रम में रुकी माननीय कुलाधिपति महोदय आनंदी बेन पटेल ने विश्वविद्यालय के विभिन्न कैंपस का निरीणक्ष कर व्यवस्थाएं परखी। बुधवार को गोपालकुंज परिसर जाकर वहां आवश्यक दिशा निर्देश दिए। साथ ही विश्वविद्यालय शिक्षकों व अधिकारियों के साथ समिक्षा बैठक की।

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