‘घूसखोर पंडत’ विवाद पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला: बोले- अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी का अपमान स्वीकार नहीं

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​नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर छिड़े विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। अखिलेश यादव ने फिल्म के शीर्षक को न केवल आपत्तिजनक बल्कि बेहद अपमानजनक करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है।

“समाजों को निशाना बनाने की राजनीति होती रही है”

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा परोक्ष तरीके से कुछ लोगों का इस्तेमाल उसी समाज के खिलाफ करती है, जिससे पूरे समुदाय को निशाना बनाया जा सके। उनके मुताबिक कभी बयानबाज़ी, कभी नोटिस, तो कभी प्रचार सामग्री और फिल्मों के जरिए माहौल बनाया जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब मामला तूल पकड़ता है तो रुख बदल लिया जाता है और दिखावे की कार्रवाई की जाती है, जबकि भीतर ही भीतर ऐसे विवादों से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश रहती है।

“फिल्म का नाम लेना भी उचित नहीं”

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा फिल्म का शीर्षक इतना आपत्तिजनक है कि उसका उल्लेख करना भी सही नहीं। उनका कहना है कि ऐसे नाम से किसी समुदाय के प्रति नकारात्मक संदेश जाता है और इससे विभाजन बढ़ता है। उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ नाम बदल देने से भी बात नहीं बनेगी।

“आर्थिक नुकसान होगा तो रुकेगा ऐसा कंटेंट”

अखिलेश यादव के अनुसार जब तक निर्माताओं को आर्थिक झटका नहीं लगेगा, तब तक इस तरह की फिल्मों पर रोक नहीं लगेगी। उन्होंने इसे रचनात्मक स्वतंत्रता का नहीं, बल्कि रचनात्मक जिम्मेदारी का विषय बताया। उनके मुताबिक किसी एक पक्ष की भावनाएं आहत कर बनाया गया कंटेंट मनोरंजन नहीं माना जा सकता।

“सिनेमा समाज का दर्पण है, उसे साफ रहना चाहिए”

उन्होंने कहा कि अगर कोई रचना जानबूझकर किसी की मान-मर्यादा को ठेस पहुंचाती है, तो उस पर रोक लगाना अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ नहीं है। सिनेमा को समाज का दर्पण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह दर्पण साफ-सुथरा होना चाहिए, न कि ऐसा जो समाज में कटुता फैलाए।

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