बस्ती में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़, रुधौली CHC में एक्सपायरी दवाएं बांटने का आरोप

स्थानीय समाचार

(राहिल खान): बस्ती जनपद के रुधौली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। यहां मरीजों की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, CHC में तैनात फार्मासिस्ट ओपी मिश्रा ने एक महिला मरीज पुष्पावती को छह माह पूर्व एक्सपायर हो चुकी दवा थमा दी। जब परिजनों ने इस गंभीर लापरवाही को लेकर सवाल किए, तो फार्मासिस्ट भड़क उठे और मरीज को अंदर की दवा न देने की धमकी दी। इतना ही नहीं, उन्होंने बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर करने की कोशिश की।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब मरीज पक्ष द्वारा विरोध करने पर फार्मासिस्ट ने पुलिस बुलाकर जेल भेजने की धमकी तक दे डाली।

अप्रेंटिस बच्चों से चल रहा ‘ड्रग एक्सपेरिमेंट’!

इतना ही नहीं, स्वास्थ्य केंद्र में अप्रेंटिस कर रहे प्रशिक्षु बच्चे डॉक्टर द्वारा लिखी गई पर्चियों पर मनमानी कर रहे हैं। दवाएं बदली जा रही हैं और मरीजों को गलत दवाएं दी जा रही हैं, जिससे उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

समय से पहले बंद हो रहा दवा काउंटर, मरीज हो रहे परेशान

CHC रूधौली का दवा काउंटर निर्धारित समय से पहले ही बंद कर दिया जाता है, जिसके कारण दूर-दराज से आए मरीज खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। इस लापरवाही के चलते मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर दवा खरीदनी पड़ रही है।

फार्मासिस्ट की मनमानी से डॉक्टर भी मजबूर

स्वास्थ्य केंद्र में फैली अराजकता का आलम यह है कि कई डॉक्टर भी अब फार्मासिस्ट की मनमानी के आगे बेबस नजर आ रहे हैं। मरीजों को सरकारी दवा देने के बजाय निजी मेडिकल स्टोर्स से दवा लिखी जा रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

CMO बना मौन दर्शक, मरीज बेहाल

पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि CMO (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) तक को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। फार्मासिस्ट की मनमानी, स्वास्थ्यकर्मियों की उदासीनता और प्रशासन की खामोशी मरीजों के जीवन के लिए खतरा बनती जा रही है।

सरकार की योजनाओं पर पानी फेर रहा सिस्टम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री के प्रयासों के बावजूद यदि ऐसे हालात जिलों में बने रहेंगे तो स्वास्थ्य सुधार की योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।

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