आगरा। श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को भक्तिमय वातावरण में शुभारंभ हुआ। प्रथम दिन व्यास पीठ से कथावाचक जया किशोरी ने कथा का महत्व बताते हुए कहा कि सत्य केवल ईश्वर है, क्योंकि वही कभी नहीं बदलता। संसार दिखाई देता है, लेकिन परिवर्तनशील होने के कारण स्थायी नहीं है। उन्होंने भक्तों को ईश्वर के प्रति प्रेम और विश्वास को जीवन का सबसे बड़ा आधार बताया।
कथा के प्रथम दिन जया किशोरी ने कहा कि वेद व्यास जी ने श्रीमद्भागवत के प्रथम श्लोक में ही ईश्वर के तीन स्वरूप बताए हैं। ये हैं- सत्य, चित्त और आनंद। उन्होंने कहा कि वास्तविक आनंद वही है जो जीवनभर साथ रहे। गृहस्थ जीवन में रहते हुए संसार के सभी सुखों का आनंद लिया जा सकता है, लेकिन ईश्वर को कभी नहीं भूलना चाहिए। ईश्वर से प्रेम ऐसा आनंद देता है, जिसमें व्यक्ति केवल प्रभु की निकटता से भी प्रसन्न रहता है।
फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में आयोजित कथा में कथा व्यास ने भक्तों को अमृतमयी कथा का रसपान कराया। कथा के दौरान भजनों पर सैकड़ों श्रद्धालु झूम उठे। पूरे परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण दिखाई दिया।
कथावाचक जया किशोरी ने प्रेम का महत्व बताते हुए कहा कि सोना-चांदी या महंगी वस्तुएं सबसे कीमती नहीं होतीं, क्योंकि वह कई लोगों के पास हो सकती हैं। सबसे अनमोल वह प्रेम है जो किसी और के पास न हो। उन्होंने कहा कि सच्चे प्रेम की पहचान यही है कि उसमें स्वार्थ न हो और वह बार-बार बदलता न हो।
नारी शक्ति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि समझदार महिला वही है जिसे पता हो कि कब उसे लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा और काली के रूप में अपनी भूमिका निभानी है। हालांकि गलत समय पर किसी भी रूप का अनुकरण परेशानी का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चियों के मन में कभी कमजोरी का भाव पैदा नहीं करना चाहिए।
हजार गलतियां करें, लेकिन एक गलती दोबारा न दोहराएं
जया किशोरी ने जीवन में गलतियों से सीख लेने का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य से कदम-कदम पर गलतियां होती हैं। गलती तभी होती है जब व्यक्ति कुछ नया करने या सीखने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि हजार गलतियां करना गलत नहीं है, लेकिन एक ही गलती को बार-बार दोहराना सबसे बड़ी भूल है। यदि व्यक्ति लगातार वही गलती दोहराता है तो इसका अर्थ है कि वह एक ही गड्ढे में बार-बार गिर रहा है और उससे सीख नहीं ले रहा। कथा के दौरान आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
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