रामसेतु प्राकृतिक है या मानव निर्मित? ASI के पास नहीं है कोई जवाब, RTI में हुआ बड़ा खुलासा

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आगरा/नई दिल्ली: वर्षों से आस्था, इतिहास और राजनीति के केंद्र में रहे ‘रामसेतु’ को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में ASI मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि रामसेतु फिलहाल ‘राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक’ नहीं है। विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि इसे संरक्षित स्मारक घोषित करने से संबंधित कोई भी प्रस्ताव फिलहाल सरकार के पास विचाराधीन या लंबित नहीं है।

प्राकृतिक या मानव निर्मित? ASI ने साधी चुप्पी:

आगरा निवासी डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य द्वारा 13 जनवरी 2026 को दायर की गई RTI पर विभाग ने 17 फरवरी को जवाब दिया। आरटीआई में एक अहम सवाल यह भी था कि क्या रामसेतु एक प्राकृतिक संरचना है या इसे मानव (वानर सेना) द्वारा निर्मित किया गया है। इस संवेदनशील सवाल पर ASI ने कोई भी स्पष्ट राय देने से परहेज किया। विभाग की इस चुप्पी के बाद रामसेतु की उत्पत्ति को लेकर चल रही बहस एक बार फिर गरमा सकती है।

​धार्मिक और वैज्ञानिक विमर्श:

रामसेतु (एडम्स ब्रिज) भारत के तमिलनाडु से श्रीलंका के मन्नार द्वीप तक फैली एक शृंखला है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसे भगवान श्रीराम की लंका यात्रा के लिए बनाया गया था, जबकि कुछ भू-वैज्ञानिक इसे चूना पत्थर के उथले पत्थरों की प्राकृतिक बनावट मानते हैं। ASI के इस ताजा जवाब ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानूनी और आधिकारिक तौर पर इसे अभी तक वह दर्जा नहीं मिला है, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही है।

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