राम मंदिर में धर्म ध्वजारोहण कार्यक्रम में अवधेश प्रसाद को निमंत्रण न मिलने पर सियासत गरमाई, सपा सांसद बोले- दलित होने के कारण मुझे नहीं बुलाया गया

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अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज अभिजीत मुहूर्त में धर्म ध्वजारोहण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने पारंपरिक तरीके से ध्वजा आरोहण कर पूजा-अर्चना की। इस ऐतिहासिक आयोजन के बीच अब राजनीतिक विवाद तेज हो गया है, क्योंकि कार्यक्रम में स्थानीय सपा सांसद अवधेश प्रसाद को निमंत्रण नहीं भेजा गया।

“दलित होने के कारण मुझे नहीं बुलाया गया” — अवधेश प्रसाद

फैजाबाद लोकसभा सीट से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें दलित समाज से होने के कारण निमंत्रण नहीं दिया गया। उन्होंने लिखा “रामलला के दरबार में धर्म ध्वजा स्थापना कार्यक्रम में मुझे न बुलाए जाने का कारण मेरा दलित समाज से होना है। यह राम की मर्यादा नहीं, संकीर्ण सोच का परिचय है। राम सबके हैं। मेरी लड़ाई किसी पद या निमंत्रण की नहीं, सम्मान, बराबरी और संविधान की मर्यादा की है।”

अवधेश प्रसाद ने आगे कहा कि यह उनका जन्मस्थान और संसदीय क्षेत्र है, फिर भी उन्हें कार्यक्रम का कार्ड या पास नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट स्थानीय लोगों की अनदेखी कर रहा है और “बाहरी लोगों” को महत्व दे रहा है।

उन्होंने दावा किया कि जिलाधिकारी ने उन्हें बताया कि आमंत्रण भेजने की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है, और ट्रस्ट ही यह तय करता है कि किसे बुलाना है।

सपा सांसद ने कहा “अगर मुझे बुलाया जाता, तो मैं नंगे पैर स्नान कर पवित्र वस्त्र पहनकर ही दर्शन करने जाता। प्रभु श्री राम जन-जन के हैं, गरीब, कमजोर और दलित—सबके हैं। लेकिन भाजपा सोचती है कि राम सिर्फ उनके हैं।”

कांग्रेस ने भी साधा निशाना

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी कार्यक्रम में अवधेश प्रसाद को न बुलाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा “अवधेश प्रसाद दलित हैं, इसलिए उन्हें निमंत्रण नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री आ रहे हैं और स्थानीय सांसद को न बुलाया जाए—इससे बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात क्या हो सकती है?”

ट्रस्ट पर आरोप, राजनीति में नई हलचल

मंदिर ट्रस्ट की ओर से इस विवाद पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन सपा और कांग्रेस दोनों ने इस मुद्दे को भेदभाव और राजनीतिक मनमानी करार दिया है। राम मंदिर में ध्वजारोहण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के बीच इस विवाद ने अयोध्या की सियासत में नया ताप ला दिया है।

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