शंकराचार्य के बिना स्नान किए लौटने पर सियासी उबाल: अखिलेश बोले- सत्ता के अहंकार ने सनातन परंपरा को पहुंचाई ठेस

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लखनऊ। प्रयागराज माघ मेले में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बिना स्नान किए वापस लौटने की घटना ने उत्तर प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे सनातन परंपरा का अपमान बताते हुए भाजपा सरकार को ‘सत्ता के अहंकार’ में डूबा हुआ बताया है।

​’अत्यंत अनिष्टकारी है यह घटना’

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि जगद्गुरु शंकराचार्य का तीर्थराज प्रयाग की धरती से बिना पवित्र स्नान किए लौट जाना एक अत्यंत अनिष्टकारी घटना है। उन्होंने कहा कि भाजपा के दंभ ने अनादिकाल से चली आ रही सनातनी परंपरा को ठेस पहुँचाई है, जिससे पूरे विश्व का सनातन समाज आहत और भयभीत है।

पालकी उठाकर ले जाने की दी सलाह

सपा प्रमुख ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा और उसके सहयोगियों को सत्ता की हनक त्यागकर अपने कंधों पर शंकराचार्य जी की पालकी उठाकर उन्हें त्रिवेणी-संगम तक ले जाना चाहिए था। उन्होंने लिखा, “भाजपा को भ्रष्ट साधनों से अर्जित शक्ति का इतना घमंड है कि वे संतों का सम्मान करना भूल गए हैं।”

सत्ता के पतन की चेतावनी

अखिलेश यादव ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए लिखा कि संतों का मन दुखाकर कोई सुखी नहीं रह सकता। उन्होंने महाकाव्यों का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों में व्यवधान उत्पन्न करने वाले ‘दुर्जन’ कभी घमंड के दंड से नहीं बच पाते। अपने बयान के अंत में उन्होंने सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन का संकेत देते हुए लिखा— “आहत संत अर्थात सत्ता का अंत!”

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