आगरा। ताजनगरी आगरा अब सिर्फ अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए ही नहीं, बल्कि चिकित्सा-विज्ञान के बड़े विमर्श केंद्र के रूप में भी पहचानी जाएगी। आगामी 10 और 11 जनवरी को आगरा में ‘द्वितीय ऑल इंडिया होम्योपैथिक कांग्रेस’ का आयोजन होने जा रहा है। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर के प्रख्यात होम्योपैथिक चिकित्सक, शोधकर्ता और शिक्षाविद् जुटेंगे।
गंभीर बीमारियों के इलाज पर होगा विशेष फोकस
इस राष्ट्रीय कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य जटिल और असाध्य रोगों के उपचार में होम्योपैथी की भूमिका को सशक्त बनाना है। अधिवेशन के दौरान चिकित्सा जगत की बड़ी चुनौतियों, जैसे— कैंसर, ऑटिज़्म (न्यूरो-डेवलपमेंटल विकार), गंभीर त्वचा रोग, और स्टेरॉयड-निर्भर बीमारियों के प्रभावी उपचार और शोध निष्कर्षों पर गहन वैज्ञानिक चर्चा की जाएगी।
होम्योपैथी का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा आगरा
आयोजन सचिव एवं आइडियल होम्योपैथिक वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के जॉइंट सेक्रेटरी जनरल डॉ. पार्थसारथी शर्मा ने बताया कि यह आयोजन साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) उपचार की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा। उन्होंने कहा, “यह कांग्रेस आगरा को होम्योपैथी के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। हमारा लक्ष्य होम्योपैथी के समग्र और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दुनिया के सामने मजबूती से रखना है।”
एमडी जैन सभागार में सजेगी ज्ञान की महफिल
यह महत्वपूर्ण अधिवेशन हरीपर्वत स्थित एमडी जैन आचार्य शांति सागर सभागार में आयोजित किया जाएगा। इस मंच पर न केवल अनुभवी विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे, बल्कि युवा चिकित्सकों को भी अपने शोध-पत्र (Research Papers) और केस स्टडी प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।
क्यों खास है यह आयोजन?
डॉ. शर्मा के अनुसार, होम्योपैथी केवल लक्षणों का इलाज नहीं करती, बल्कि रोगी की मानसिक, शारीरिक और संवेदनात्मक स्थिति के आधार पर ‘होलिस्टिक’ उपचार प्रदान करती है। इस कांग्रेस के माध्यम से होम्योपैथी के दीर्घकालिक परिणामों और वैज्ञानिक आधार पर मंथन कर चिकित्सा पद्धति को नई दिशा दी जाएगी।
