नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव का विरोध, निगम कर्मियों ने काली पट्टी बांध कर किया कार्य

Press Release उत्तर प्रदेश

— महापौर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लाया गया था निंदा प्रस्ताव

आगरा। नगर निगम सदन में आयोजित बैठक के दौरान महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह की अध्यक्षता में नगर आयुक्त के खिलाफ लाये गये निंदा प्रस्ताव को लेकर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। निंदा प्रस्ताव के विरोध में सभी कर्मचारियों ने मंगलवार को काली पट्टी बांध कर काम किया। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि निगम के अधिकारियों के खिलाफ पार्षदों द्वारा इस प्रकार का रवैया निंदनीय है। इसे निगम कर्मचारियों द्वारा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना था कि नगर निगम आगरा की प्रस्तावित साधारण सदन की 23 मार्च की बैठक को लेकर महापौर कार्यालय से दिशा निर्देश न मिलने की वजह से असमंजस की स्थिति बन गई थी। इस संबंध में नगर निगम प्रशासन द्वारा महापौर कार्यालय को भेजे गए आलेख में प्रशासनिक और विधायी कारणों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया था कि निर्धारित तिथि पर सदन आयोजित कर पाना संभव नहीं है।
महापौर कार्यालय द्वारा 9 मार्च को जारी पत्र के क्रम में 23 मार्च को साधारण सदन बुलाने के निर्देश दिए गए थे। इसके अनुपालन में 13 मार्च को संबंधित आलेख प्रस्तुत कर यह अवगत कराया गया था कि वर्तमान में संसद का बजट सत्र संचालित है, ऐसे में नगर निगम के महत्वपूर्ण विषय विशेष रूप से बजट पर चर्चा करना अत्यंत आवश्यक है। नगर निगम बजट को 31 मार्च से पूर्व सदन में प्रस्तुत कर पारित कराना अनिवार्य बताते हुए कहा गया था कि बजट प्रस्तुत न होने की स्थिति में शहर के विकास कार्यों में कोई बाधा आ सकती है, परन्तु महापौर कार्यालय की ओर से किसी प्रकार के स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए। वहीं, वर्तमान में 9 मार्च से 2 अप्रैल तक लोकसभा का बजट सत्र जारी है। शासनादेश के अनुसार, ऐसे समय में उन बैठकों का आयोजन सामान्यतः नहीं किया जाता, जिनमें सांसद या विधायक सदस्य के रूप में नामित हों। यदि बैठक अत्यावश्यक हो, तो उसे तभी आयोजित किया जा सकता है जब संसद या विधानमंडल का सत्र लगातार तीन दिन के लिए स्थगित हो। 23 मार्च को ही उत्तर प्रदेश विधानमंडल की सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति (2025-26) की बैठक भी आगरा में प्रस्तावित थी, जिसमें जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य मानी गई है। जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, इस बैठक में संबंधित अधिकारियों को उपस्थित रहना था। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि 23 मार्च को सदन सत्र आयोजित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इस संबंध में पुनः 22 मार्च को भी आलेख महापौर कार्यालय को प्रेषित किया गया था। इसके बावजूद भी महापौर द्वारा विशेष सदन बुलाया गया । सदन में नगर निगम अधिकारियों के उपस्थित न रहने पर महापौर द्वारा इसे सदन की अवमानना मानते हुए निंदा प्रस्ताव रखा था जिस पर सदन में उपस्थित 72 पार्षदों ने अपनी स्वीकृति दी थी। इस कारवाई के खिलाफ आज नगर निगम कर्मचारी और अधिकारी आक्रोश प्रकट करते हुए दिनभर काली पट्टी बांध कर काम किया और कर्मचारी एकता के नारे लगाते हुए नगर आयुक्त के नेतृत्व में पूर्ण विश्वास जताया।

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