चतुर्थी पर घर लाएं गौमय गणेश, नगर निगम में सजे इको फ्रेंडली बप्पा

Press Release उत्तर प्रदेश

आगरा। गणेश चतुर्थी के पर्व पर इस बार श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली गौमय गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध होंगी। गाय के गोबर से तैयार इन गणेश प्रतिमाओं की बिक्री के लिए नगर निगम कार्यालय में स्टॉल लगाया गया है। यहां नौ से लेकर 18 इंच तक की आकर्षक गणेश प्रतिमाएं किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि गौमय उत्पादों को बढ़ावा देने और लोगों को पर्यावरण अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर निगम कार्यालय में स्थायी गौमय उत्पाद केंद्र स्थापित कराया गया है।
गणेश चतुर्थी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं को घरों, मंदिरों और पूजा पंडालों में स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। पर्व के समापन के बाद इन प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों और जल स्रोतों में किया जाता है। ऐसे में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी प्रतिमाओं के विसर्जन से जल प्रदूषण की समस्या बढ़ती है। पीओपी पानी में आसानी से घुलता नहीं है और इसके अवशेष जलीय पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए लव यू जिंदगी फाउंडेशन की ओर से गाय के गोबर से गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इन प्रतिमाओं को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के तौर पर श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। गौमय प्रतिमाओं का उपयोग धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और गोवंश आधारित उत्पादों को प्रोत्साहन देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
संस्था के संचालक प्रांकुर जैन के अनुसार नगर निगम कार्यालय में लगाए गए स्टॉल पर शनिवार को 12 बजे से सायं चार बजे और रविवार को 12 बजे से शाम 6 बजे तक गौमय गणेश प्रतिमाओं की बिक्री की जाएगी। श्रद्धालु अपनी आवश्यकता और पूजा स्थल के अनुसार अलग-अलग आकार की प्रतिमाएं खरीद सकेंगे। नौ इंच की प्रतिमा की कीमत लगभग 300 से 400 रुपये, 12 इंच की प्रतिमा 600 रुपये से 800 तथा 18 इंच की प्रतिमा 1800 रुपये रखी गई है।

डॉ. अजय ने बताया कि गौमय गणेश प्रतिमाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके विसर्जन के लिए श्रद्धालुओं को नदी या अन्य जल स्रोतों तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इनका विसर्जन घर में ही गमले, बाल्टी अथवा किसी अन्य पात्र में पानी डालकर किया जा सकता है। प्रतिमा के घुलने के बाद प्राप्त सामग्री को पौधों और पेड़-पौधों के लिए खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे प्रतिमा का धार्मिक उपयोग पूरा होने के बाद भी उसका उपयोगी स्वरूप बना रहता है और जल स्रोतों में प्रदूषण फैलने की आशंका नहीं रहती।

—– नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने शहरवासियों से अपील की कि गणेश चतुर्थी पर पीओपी की प्रतिमाओं के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल गौमय प्रतिमाओं को प्राथमिकता दें। इससे धार्मिक परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मजबूत होगा। साथ ही गौमय उत्पादों को बढ़ावा मिलने से गोवंश आधारित उत्पादों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी।
नगर निगम की इस पहल का उद्देश्य गणेश उत्सव को पर्यावरण हितैषी बनाने के साथ शहरवासियों को ऐसे विकल्प उपलब्ध कराना है, जिनसे आस्था और प्रकृति दोनों का संरक्षण हो सके। नगर निगम कार्यालय में लगाया गया गौमय उत्पाद केंद्र इसी दिशा में एक स्थायी पहल के रूप में काम करेगा।ओ

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