सेंसरयुक्त ड्रेनेज और कवर नालों से बदलेगी शहर की सूरत, स्टडी टूर से लौटे पार्षद महापौर को सौंपी रिपोर्ट
आगरा। सुलहकल की नगरी आगरा को और अधिक स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर निगम के पार्षदों ने अब दक्षिण भारत के विकसित शहरों की तर्ज पर सिस्टम लागू करने की मांग उठाई है। हाल ही में बेंगलुरु, मैसूर और ऊटी के स्टडी टूर से लौटे पार्षदों ने साफ कहा है कि इन शहरों की तरह आधुनिक ड्रेनेज और सफाई व्यवस्था आगरा में भी लागू की जानी चाहिए।
पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट महापौर को सौंप दी, इस विषय पर नगर निगम सदन में चर्चा कर ठोस निर्णय लिया जाएगा।
आगरा नगर निगम के 72 पार्षद हाल ही में दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों के भ्रमण पर गए थे, जहां उन्होंने शहरी व्यवस्थाओं का गहन अध्ययन किया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से ड्रेनेज सिस्टम, सीवरेज नेटवर्क और सफाई व्यवस्था को करीब से समझा।
स्टडी टूर से लौटे वरिष्ठ पार्षदों में प्रकाश केशवानी , कप्तान सिंह, डॉ. यशपाल सिंह, बंटी माहौर, सुनील शर्मा, रेखा भास्कर, गंगाराम माथुर, गौरव शर्मा, हेमलता चौहान और रवि दिवाकर आदि का कहना है कि आगरा को स्मार्ट और साफ शहर बनाने के लिए अब नई तकनीक अपनाने का समय आ गया है।
पार्षदों के अनुसार, आगरा कई मामलों में पहले से मजबूत स्थिति में है। विशेष रूप से एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) और एसपीएस (सीवरेज पंपिंग स्टेशन) की तकनीक के मामले में आगरा, बेंगलुरु और मैसूर से भी आगे है। लेकिन ड्रेनेज सिस्टम में सुधार की बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि बेंगलुरु और मैसूर में सभी छोटे-बड़े नाले पूरी तरह से कवर किए गए हैं। इससे नालों में कूड़ा फेंकने की समस्या लगभग खत्म हो गई है और जल प्रवाह भी सुचारू बना रहता है। इसके विपरीत, आगरा में खुले नालों के कारण गंदगी और जाम की समस्या है।
सबसे अहम बात यह सामने आई कि इन शहरों में ड्रेनेज और सीवर लाइनों में सेंसर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह सेंसर सिस्टम जलस्तर, जाम और ओवरफ्लो की स्थिति की तुरंत जानकारी देता है, जिससे समय रहते कार्रवाई संभव हो पाती है। पार्षदों का मानना है कि यदि यह तकनीक आगरा में लागू की जाती है तो जलभराव और गंदगी की समस्या में काफी हद तक राहत मिल सकती है।
पार्षदों ने यह भी कहा कि वे अपनी रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं को शामिल करेंगे और नगर निगम सदन में प्रस्ताव रखकर इसे लागू कराने का प्रयास करेंगे। उनका मानना है कि यदि इन सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए तो आने वाले समय में आगरा की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। नगर निगम प्रशासन पार्षदों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय करेगा। यदि पार्षदों की यह पहल अमल में आती है, तो आगरा में शहरी व्यवस्थाओं के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


