आगरा। गुजरात की एक फर्म ताजनगरी के पते पर कारोबार दिखाकर करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत दावा करने के मामले में फंस गई है। एसजीएसटी अधिकारी विवेक मित्तल की शिकायत पर मैसर्स जाधव ट्रेडर्स के मालिक जाधव रणजीतभाई जसाभाई के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और कर चोरी सहित कई गंभीर धाराओं में थाना लोहामंडी में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब फर्म के बिलिंग नेटवर्क, फर्जी कंपनियों से जुड़े कड़ियों, बैंक खातों और पूरे आर्थिक सिंडिकेट की जांच में जुटी है।
राज्य कर विभाग ने 5 जुलाई 2025 को फर्म के पते 98, फतेहपुर सीकरी रोड, जोगी पाड़ा, शाहगंज पर गुप्त जांच की थी। जांच में पाया गया कि वहां ऐसी कोई फर्म मौजूद ही नहीं थी। स्थानीय लोगों ने भी इस नाम की किसी कंपनी को न कभी देखा और न उसके बारे में सुना। पंजीकृत मोबाइल नंबर भी बंद मिला। इससे साफ हुआ कि फर्म केवल कागजों में चलाई जा रही थी।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, बिना किसी वास्तविक माल खरीद के फर्म ने फर्जी बिल बनाए और गलत इनवर्ड सप्लाई दिखाकर 3,60,52,848.36 रुपये का बोगस आईटीसी तैयार किया, जिससे राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा। जीएसटी कानून की धारा 16(2)(c) के तहत यह गंभीर अपराध माना जाता है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जाधव ट्रेडर्स का जीएसटी पंजीकरण 4 दिसंबर 2024 को कराया गया था। मालिक ने सूरत (गुजरात) का पता, मोबाइल नंबर, ईमेल और पीएनबी बैंक खाते का विवरण दिया था। अनियमितताएँ मिलने के बाद पंजीकरण को 5 जुलाई 2025 को जीएसटीएन नियम 21(a) के तहत रद्द कर दिया गया।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि फर्म द्वारा प्रस्तुत अधिकतर दस्तावेज संदिग्ध थे। वित्तीय वर्ष 2024-25 में फर्म ने नीलू एंटरप्राइज से 20 करोड़ से अधिक की इनवर्ड सप्लाई दिखाई, जबकि यह सप्लायर 23 जून 2025 को ही रद्द किया जा चुका था। इसी गैर-मौजूद फर्म से बिलिंग दिखाकर जाधव ट्रेडर्स ने 3,60,73,098 रुपये का फर्जी आईटीसी क्लेम किया।
फर्म ने अपनी आउटवर्ड सप्लाई काशवी एंटरप्राइज़ के नाम पर दर्ज की। कुल बिक्री 20,02,93,602 रुपये दिखाई गई और कर देयता 3,60,52,848.36 रुपये बताई गई, जिसे पूरी तरह फर्जी आईटीसी के माध्यम से समायोजित कर दिया गया—जो जीएसटी कानून का सीधा उल्लंघन है।
