
—- गृहकर ओटीएस की 65 लाख वसूली नाकाफी, पार्षदों ने जताई नाराजगी
—- सदन में योजना की समीक्षा, जोनवार कैंप लगाकर अधिक से अधिक करदाताओं को लाभ दिलाने पर जोर
आगरा। नगर निगम में सरकार की ओर से गृहकर वसूली के लिए लागू की गई एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) को अधिक प्रभावी बनाने को लेकर मंगलवार को नगर निगम सदन में पार्षदों और अधिकारियों की बैठक हुई। महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। पार्षदों ने ओटीएस के तहत अब तक हुई करीब 65 लाख रुपये की वसूली को नाकाफी बताते हुए योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार और इसके क्रियान्वयन को सरल बनाने पर जोर दिया। महापौर ने ओटीपी की समस्या को मुख्य मंत्री के समक्ष उठाने की बात कही। कहा कि अधिकारी और पार्षद योजना का अधिकाधिक प्रचार प्रसार करें। आर आई और पार्षदों को सूची उपलब्ध हो जिससे वांछित व्यक्ति तक ओटीएस लाभ पहुंचाया जा सके। ओटीएस को लेकर आ रहीं समस्याओं के निदान के लिए हेल्प डेस्क एक्टिव रहे। शहर में होने वाले कार्यक्रमों में भी अधिकारी और पार्षद योजना का प्रचार प्रसार करें।अधिकारियों और कर्मचारियों की अगर कभी है तो उन्हें बढ़ाया जाए।
बैठक में पार्षदों ने कहा कि सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना बकायेदारों को राहत देने के साथ नगर निगम की आय बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में योजना का लाभ अधिक से अधिक गृहकरदाताओं तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए निगम स्तर पर विशेष अभियान चलाने, लोगों को योजना की जानकारी देने और करदाताओं की समस्याओं का मौके पर समाधान करने की जरूरत बताई गई। योजना का लाभ उठाने के लिए मिशन मोड में काम करने पर भी बल दिया गया।
जोनवार कैंप लगाकर पहुंचाएं योजना का लाभ—–
पार्षदों ने सुझाव दिया कि नगर निगम के पास उपलब्ध गृहकर संबंधी डेटा का जोनवार विश्लेषण कराया जाए। इसके बाद संबंधित क्षेत्र में कर्मचारियों की टीमें गठित कर कैंप लगाए जाएं। इन कैंपों के माध्यम से बकायेदारों को ओटीएस की जानकारी देने के साथ मौके पर ही योजना का लाभ दिलाने की व्यवस्था की जाए। इससे उन लोगों तक भी योजना की जानकारी पहुंच सकेगी, जो निगम कार्यालय तक नहीं पहुंच पाते हैं।
बैठक में योजना के प्रचार-प्रसार को लेकर भी विशेष रणनीति बनाने पर जोर दिया गया। पार्षदों ने कहा कि केवल कार्यालयों तक योजना सीमित रखने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। वार्ड स्तर पर जनप्रतिनिधियों के सहयोग से लोगों को जागरूक किया जाए और उन्हें बताया जाए कि ओटीएस के तहत बकाया गृहकर जमा करने पर उन्हें किस तरह राहत मिल सकती है।
—– 65 लाख की वसूली को नाकाफी बताया —-
ओटीएस के तहत अब तक नगर निगम की ओर से की गई करीब 65 लाख रुपये की वसूली को बैठक में अपेक्षा के अनुरूप नहीं माना गया। पार्षदों ने कहा कि शहर में बड़ी संख्या में गृहकर बकाया है। इसके बावजूद योजना के तहत इतनी कम वसूली होना अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने अधिकारियों से योजना को गति देने और लक्ष्य निर्धारित कर काम कराने की मांग की।
पार्षदों ने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर कर्मचारी या अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं तो उनकी जिम्मेदारी तय की जाए। योजना का लाभ दिलाने में उदासीनता बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि अभियान को गंभीरता से लिया जा सके।
सरलीकरण पर भी दिया गया जोर—-
बैठक में ओटीएस योजना की प्रक्रिया को आम करदाताओं के लिए अधिक सरल और सुगम बनाने के सुझाव दिए गए। पार्षदों का कहना था कि आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया में यदि किसी तरह की जटिलता है तो उसे दूर किया जाए। करदाताओं को अनावश्यक रूप से निगम कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसकी व्यवस्था की जाए।
महापौर ने अधिकारियों से योजना की प्रगति की लगातार समीक्षा करने और पार्षदों के सुझावों को अमल में लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक करदाताओं को योजना से जोड़ना होना चाहिए, ताकि उन्हें राहत मिलने के साथ नगर निगम की राजस्व स्थिति भी मजबूत हो। इस दौरान योजना क्रियान्वयन में लगे कमचारियों ने भी अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
बैठक में नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य, अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार, सीएफओ बृजेश सिंह, सहायक नगर आयुक्त श्रद्धा पांडेय, अशोक प्रिय गौतम, मुख्य कर अधिकारी शिवकुमार गौतम समेत नगर निगम के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


