
आगरा। नगर की धार्मिक व सामाजिक संस्था सुखमनी सेवा सभा द्वारा साप्ताहिक कीर्तन दरबार के अंतर्गत अमृतमयी भव्य कीर्तन दरबार गुरुद्वारा श्री कलघीधर सदर में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम सिख धर्म के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व को समर्पित रहा। सर्वप्रथम सभा के युवाओं द्वारा सुखमनी साहिब के पाठ समूह संगत के साथ मिलकर किए गए ।उपरांत पावन स्थान गुरुद्वारा बडू साहिब हिमाचल प्रदेश से आए प्यारे बच्चों ने अपनी रसमई शैली में कीर्तन का गायन किया उसके बाद सभा के प्यारे वीर महेंद्र पाल सिंह ने अपनी मधुर वाणी से सभी को भाव विभोर कर दिया उन्होंने कहा कि सिख धर्म के छठे गुरु हरगोबिंद साहिब जहां संत थे वहां सिपाही भी थे इसलिए उन्होंने दो किरपान धारण की एक मीरी की एक पीरी की, गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्वालियर में कैद 52 राजाओं को मुक्त कराया था इसीलिए ग्वालियर किले पर स्थित गुरुद्वारा साहिब को गुरुद्वारा बंदी छोड़ नाम दिया गया।
वीर जी ने कहा जैसे अन्न ना खाएं शरीर मर जाता है, ऐसे ही नाम ना जपें तो जमीर मर जाता है। जिसकी जमीर मर जाती है उसकी तकदीर मर जाती हैं इसलिए नाम जपते रहोगे जमीर बच जाएगी जमीर बच जाएगी तो तकदीर बन जाएगी, इस अवसर पर विशाल जन समूह में एक रस होकर कीर्तन का आनंद लिया,ज्ञानी अमरीक सिंह द्वारा अरदास हुक्कमनामा अपरान्त गुरु महाराज के अटूट लंगर का वितरण हुआ जिसे समूह संगत ने एक साथ बैठकर ग्रहण किया। इस अवसर पर अमरदेव सिंह साहनी, बंटी ओबेरॉय, गुरु सेवक श्याम भोजवानी, हरभजन सिंह, गुरमीत सिंह सेठी, हेमू भाई, कुलविंदर सिंह, निर्मल सिंह,बबलू अरसी,अमरजीत सिंह,वाधवा दलजीत सिंह दुग्गल, गुरदीप लूथरा,अशोक अरोड़ा, अरविन्द सिंह पप्पी,सतीश सिंह अरोड़ा,रूप किशोर सुखवानी आदि मौजूद थे।


