भारतीय साहित्य और रामकथा के वैश्विक संवाहक प्रो. लवकुश मिश्रा सम्मानित, काशी में मिला साहित्य सेवा शिरोमणि सम्मान

Press Release

आगरा। विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी में “भारतीय अस्मिता की संजीवनी : श्री राम कथा” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं होटल प्रबंधन संस्थान में पर्यटन विभाग के प्रोफेसर प्रो. लवकुश मिश्रा को साहित्य सेवा शिरोमणि सम्मान–2025 से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान अमेरिका की संस्था पंडित तिलक राज शर्मा मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा प्रदान किया गया।

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन वाराणसी में तारक सेवा संस्था, अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान तथा वृन्दावन शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। संगोष्ठी में विश्व के आठ देशों से आए विद्वानों और प्रतिनिधियों ने सहभागिता की और रामकथा, भारतीय संस्कृति तथा वैदिक परंपराओं पर गहन विमर्श किया।

प्रो. लवकुश मिश्रा को यह सम्मान भारतीय साहित्य, संस्कृति और रामकथा पर उनके निरंतर शोध, लेखन और वैश्विक अकादमिक योगदान के लिए प्रदान किया गया। भारतीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने में उनके कार्य को विशेष रूप से सराहा गया। उल्लेखनीय है कि प्रो. मिश्रा इससे पूर्व भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत हो चुके हैं।

प्रो. मिश्रा की अब तक 21 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और वे 25 देशों में अकादमिक व्याख्यान दे चुके हैं। उनका साहित्यिक और शैक्षणिक कार्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना, रामकथा और साहित्यिक विमर्श को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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