आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर में दुष्कर्म के मामले में एक प्रोफेसर के जेल जाने का मामला भी ठंडा नहीं हुआ है कि एक और लव गुरु का कारनामा सामने आया है। संविदा पर तैनात एक शिक्षक के द्वारा अपने ही संस्थान की छात्राओं का झांसा देकर शोषण किया जा रहा था। उन्हें अश्लील मैसेज भी किए जाते थे। तीन छात्राओं की आपस में बात होने पर गुरु जी की पोल खुल गई। शिकायत होने पर उन्हें गुपचुप तरीके से हटा दिया गया है। मीडिया को भनक नहीं लगने दी और ना ही उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने दिया है। सवाल खड़े हो रहे हैं जब प्रोफेसर दोषी नहीं था तो उसे हटाया क्यों? जब दोषी है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं कराया?
पालीवाल पार्क परिसर में एक संस्थान है। यहां पर संविदा पर तैनात एक शिक्षक का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि शिक्षक के द्वारा अपनी ही एक छात्रा को झांसे में ले लिया गया। इसके बाद उसका शोषण किया गया। एक अन्य छात्रा से भी वह चैटिंग करने लगा और उसे भी झांसे में ले लिया। शराब पीते समय यह मैसेज करने लगा कि मेरे साथ शराब पी लो तुम्हारे सारे काम करा दूंगा। शिक्षक के द्वारा अश्लील मैसेज भी मोबाइल पर भेजे जाते थे। इस छात्रा के साथ भी उसके द्वारा शोषण किया गया। बताया जा रहा है दोनों छात्राओं के बीच में शिक्षक को लेकर बातचीत होने पर उसकी पोल खुल गई कि वह मेरे साथ भी ऐसा कर रहा है।
इसके बाद एक तीसरी छात्रा भी दबी जुबान से बोली मुझे भी मैसेज किए जाते थे। छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत की। विश्वविद्यालय प्रशासन ने गुपचुप तरीके से शिक्षक की सेवाएं समाप्त कर एक कमेटी बना दी। जानकारों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को शिक्षक के खिलाफ मुकदमा भी लिखाया जाना चाहिए था। हाल ही में रसायन विज्ञान विभाग के एक प्रोफेसर भी दुष्कर्म के मामले में जेल गए हैं। कुलाधिपति मामले में काफी नाराज हुई थीं फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं सुधरा। पूर्व में भी यहां के शिक्षकों पर छेड़छाड़ के आरोप लगते रहे हैं। कुछ मामलों में लीपापोती कर विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामला रफा दफा कर दिया। क्या इस मामले में भी लीपापोती होगी या मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा यह देखने वाली बात होगी। आए दिन यहां के प्रोफेसर की ऐसी करतूत सामने आने के बाद आखिर इस विश्वविद्यालय में कोई अभिभावक अपनी बेटी को कैसे पढ़ाएगा?


