आगरा, 17 अक्टूबर। खेरिया मोड़ रेलवे ओवर ब्रिज का नवनिर्माण होगा । आगामी 90 दिनों तक इस पुल पर बंद रहेगा सड़क यातायात। इस आशय की विज्ञप्ति रेलवे द्वारा जारी कर क्षेत्रीय जनता को सूचित कर दिया गया। लेकिन आज सुबह जैसे ही पुल बंद हुआ, स्थानीय लोगों की दुश्वारियां शुरू हो गयीं। कई लोगों ने तो आज अपने पाल्यों को स्कूल ही नहीं भेजा, जिन्होंने भेजा, वे मुसीबत में फंस गये। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि लगभग 1970 में बना यह पुल जर्जर हो गया है।कभी भी कोई हादसा हो सकता है।इसलिये बारहखंभा वाले आरओबी का निर्माण रोककर पहले खेरिया वाले पुल के गर्डर बदले जा रहे हैं। इसमें लगभग 90 दिन का समय लगेगा।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि 50 वर्ष की निर्धारित कोडल लाइफ पूरी होने और जर्जर स्थिति को देखते हुए निर्णय लिया गया है। शहरवासियों को मिलेगी सुरक्षित एवं बेहतर यातायात सुविधा। इसके लिये जिला पुलिस एवं प्रशासन द्वारा व्यवस्था भी की गयी है लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर है। आज सुबह से ही बारह खंभा रोड पर जाम लग गया है। लोग परेशान हैं कि कैसे तो ड्यूटी पहुंचें और कैसे बच्चे स्कूल जाएंगे। आज सुबह पुल के पास तक तमाम वाहन वाले पहुंच रहे थै, जिनको सही जानकारी नहीं थी। हाालंकि वे बैरंग लौट रहे थे। जबकि पैदल यात्री आड़मोड़ से घुसते हुए पुल पार कर रहे थे। कोई अपने बच्चे को ऊपर से ही पुल पर लगा बैरीकेड पार करा रहे थे।
रेलवे वालों ने तो पुल पर पूरी तरह किलेबंदी कर दी है। जिससे परिंदा भी पर नहीं मार पाये। लेकिन परेशान हाल पैदल यात्री किसी तरह टेढ़े-मेड़े होकर जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं।हालांकि इस जबर्दस्ती वाली खिड़की को भी रेलवे वाले जल्द ही बंद कर देंगे।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि खेरिया मोड़ रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण लगभग वर्ष 1970 में किया गया था। पुल में लगे 02 स्पॉन की निर्धारित कोडल लाइफ 50 वर्ष पूरी हो चुकी है तथा इसकी जर्जर अवस्था को देखते हुए नवनिर्माण एवं आवश्यक अनुरक्षण कार्य किया जाना जरूरी है। पुल की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में किसी संभावित दुर्घटना की आशंका को रोकने के लिए यह कार्य किया जा रहा है।
पुल का नवनिर्माण पूरा होने के बाद शहरवासियों को अधिक सुरक्षित और बेहतर आधारभूत संरचना का लाभ मिलेगा। इससे पुल की स्थिति में सुधार होगा तथा लंबे समय तक सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। रेलवे प्रशासन ने यह कदम यात्रियों, वाहन चालकों और आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
रेल प्रशासन आमजन से अपील की है कि निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करें, यातायात संबंधी निर्देशों का पालन करें तथा कार्य को समयबद्ध और सुरक्षित ढंग से पूरा कराने में सहयोग प्रदान करें।
उधर बारहखंभा रोड भी पूरी तरह सही नहीं हुआहै।जिसके कारण लोग परेशान के साथ ही नाराज भी हैं। क्षेत्रीय नागरिकों के अलावा दुकानदारों की मीटिंगें लगातारचलरही हैं। उनका कहना है कि दीपावली के बाद पुल बंद होता तो ठीक था। वहीं कुछ दुकानदारों का कहना है कि बारहखंभा क्षेत्र से अतिक्रमण हटाते हुए सड़क की पहले मरम्मतकरायी जानी चाहिये थी।
मरीजों के लिये आफत
मरीजों के लिये यहां से निकलना टेढ़ी खीर हो गया है। एंबुलेंस तक को निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है। जिससे मरीज की जान जोखिम में न पड़े। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन को इस ओर पहले से ध्यान देना चाहिये था।
व्यवस्थाएं नाकाफी
ईदगाह रेलवे पुल बंद होने के बाद की दुश्वारियों को रोकने के लिये प्रशासन द्वारा जो व्यवस्थाएं की गयी हैं, वे नाकाफी हैं। पुलिस वालों ने बैरीकेड लगाकर भारी वाहनों को इधर आने से रोक दिया है। लेकिन टेंपो , कार , स्कूटर मोटरसाइकिल, स्कूल वाहनों की संख्या भी बहुत अधिक है। इसलिये सुबह से बारहखंभा रोड पर धूल के गुबार उठ रहे हैं।
सुबह से ही जाम
आज सुबह तड़के से ही जाम के हालात हैं। दिन में और शाम को जब बारहखंभा वाला रेलवे फाटक भी बंद हो जा रहा है तब तो भीषणतम जाम के हालात बन जा रहे हैं। इसलिये प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अच्छी यातायात व्यवस्था करनी पड़ेगी। इस रास्ते से लाखों की संख्या में वाहन शहर की ओर प्रतिदिन आते और जाते हैं। इसी कारण आज पहले ही दिन सुबह से जाम लग गया है। दोपहर के बाद क्षेत्रीय लोगों तथा दुकानदारों द्वारा कड़ा विरोध जताये जाने के पश्चात जनप्रतिनिधि भी जागे। तब जाकर ट्रैफिक पुलिस ने भी सक्रियता दिखायी। इसके पश्चात जाम से कुछ राहत मिली। क्षेत्रीय विधायक डा. जी एस धर्मेश ने कहा है कि आज रात में बारहखंभा वाली सड़क बनवा दी जाएगी। विरोध जताने वाले प्रमुख लोगों में अजीतनगर बाजार कमेटी के अध्यक्ष राजेश यादव, मनोज नोतनानी आदि थे।


