जब प्रभु को सुलाने उतरा भक्तिभाव: गोवर्धन में शयन उत्सव के साथ छप्पन भोग महोत्सव का भावपूर्ण समापन

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आगरा/गोवर्धन। ब्रजभूमि में भक्ति केवल विधि-विधान नहीं, बल्कि वह आत्मीय अनुभूति है, जहां भक्त और भगवान के बीच दूरी समाप्त हो जाती है। ऐसा ही वात्सल्य और अपनत्व से भरा दृश्य सोमवार की मध्यरात्रि श्री गुरु काष्र्णि आश्रम, गोवर्धन में देखने को मिला, जब श्री गिरिराज जी सेवा मंडल परिवार, आगरा द्वारा आयोजित दो दिवसीय छप्पन भोग एवं फूल बंगला महोत्सव का समापन भावपूर्ण शयन उत्सव के साथ हुआ।

काष्र्णि आश्रम परिसर में सजी वैकुंठ लोक की दिव्य झांकी के मध्य स्वर्ण हंस रथ पर विराजमान गिरिराज महाराज ने दिनभर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। कोई मनौती लेकर आया, तो कोई कृतज्ञता भाव से नतमस्तक हुआ। रात्रि होते-होते सेवकों और श्रद्धालुओं के हृदय में यह कोमल भाव जाग उठा कि निरंतर भक्तों की कामनाएं पूर्ण करते-करते प्रभु विश्राम चाहते होंगे। इसी भाव से शयन उत्सव की दिव्य शुरुआत हुई।

शयन सेवा में प्रभु श्रीअंगों पर सुगंधित इत्र अर्पित किया गया, प्रेमपूर्वक नजर उतारी गई और चरण कमलों को वात्सल्य भाव से दबाया गया। शयन आरती के समय जब करुण भजन “नैनन में नींद समा गई, मेरे प्रिय प्रभु के…” गूंजा, तो समूचा वातावरण भावविभोर हो उठा। ऐसा प्रतीत हुआ मानो भक्त स्वयं प्रभु से विश्राम का अनुरोध कर रहे हों। अनेक श्रद्धालुओं की आंखें सजल हो उठीं और हृदय प्रभु प्रेम में डूब गया।

शयन से पूर्व भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, संस्थापक नितेश अग्रवाल, सह-संस्थापक मयंक अग्रवाल, संरक्षक महंत कपिल नागर एवं रविंद्र गोयल तथा अध्यक्ष अजय सिंघल द्वारा प्रभु को रजत पात्र में केसर मिश्रित अमृततुल्य दूध अर्पित किया गया। इसके उपरांत काष्र्णि महंत हरिओम बाबा ने पंच-ज्योतियों से प्रभु की दृष्टि उतारी और ब्रज भाव से परिपूर्ण मंत्रोच्चार के बीच गिरिराज महाराज को शयन कराया। यह क्षण इतना अलौकिक था कि श्रद्धालु देर तक निश्चल भाव से प्रभु के दर्शन करते रहे। आधी रात तक आश्रम द्वार पर भक्तों की कतारें लगी रहीं।

भजनों में डूबे श्रद्धालु, देर रात तक गूंजा ब्रज रस

शयन उत्सव से पूर्व आयोजित भजन संध्या में ब्रज भाव की रसधारा प्रवाहित होती रही। कानपुर की प्रसिद्ध आल्या शर्मा सिस्टर्स—नीतू और चंचल—द्वारा प्रस्तुत “नैनन में नींद समा गई…”, “थारो नाम ही आधार गिरिराज…” और “सांवरे को निहारूं मैं रात दिन…” जैसे भजनों पर श्रद्धालु करतल ध्वनि के साथ भावविभोर होकर झूमते रहे।

महा प्रसादी सेवा में हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रभु प्रसाद ग्रहण किया। स्वयंसेवकों की निष्ठा और समर्पण से आयोजन सुव्यवस्थित रहा और प्रत्येक भक्त प्रभु कृपा से अभिभूत नजर आया। पूरे दिन और देर रात तक भक्तों का सैलाब उमड़ता रहा, जिससे आश्रम परिसर भक्ति और आनंद से सराबोर रहा।

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