
जयपुर। पिंक सिटी जयपुर के देव नगर मुरलीपुरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस रविवार को कथा व्यास पं. गरिमा किशोरी जी ने भागवत के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य के कर्तव्यों का वास्तविक बोध केवल श्रीमद्भागवत के श्रवण से ही होता है। उन्होंने कहा कि यह जीवन क्षणभंगुर है, फिर भी मनुष्य मृत्यु को जानते हुए भी उसे स्वीकार नहीं करता—यही सबसे बड़ी विडंबना है।
कथा व्यास ने बताया कि जो व्यक्ति निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करता है, वह अपने जन्म और मरण—दोनों को सार्थक कर लेता है। उन्होंने कहा कि प्रभु जब भी अवतार लेते हैं तो माया उनके साथ रहती है, किंतु साधारण मनुष्य माया को ही शाश्वत मानकर शरीर को प्रधान मान बैठता है। जबकि शरीर नश्वर है। श्रीमद्भागवत हमें सिखाती है कि निष्काम कर्म ही सच्ची भक्ति का आधार है।
कथा के दौरान ब्रज के रसिक संगीतकार बलवीर सिंह ‘बल्लो’ ने सुमधुर एवं भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भजनों की रसधारा में भक्त झूम उठे। भक्तों द्वारा पंडाल को अत्यंत सुंदर एवं आकर्षक ढंग से सजाया गया। जिससे मुरलीपुरा का कथा स्थल साक्षात वृंदावन धाम जैसा प्रतीत हो रहा था।
इस पावन अवसर पर समासेवी श्याम भोजवानी ने बताया कथा के चतुर्थ दिवस कृष्ण जन्मोहत्सव की धूम रहेगी। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रदीप कुमार, योगेश, भरत कुमार, राहुल, राधा किशन, जितेंद्र, विजय, कपिल, शेखर, चंद्रप्रकाश, हेमा, नीलम, ज्योति, वर्षा, दीपा, लता, जया, इंदु वर्षा, ऊषा, वीना, लीना, सावित्री, पुष्पा, आशा, सुनीता, भारती, खुशबू, वान्या, ममता, रानी, भावना, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


