
आगरा, 01.07.2026/मत्स्य संपदा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से जिलाधिकारी मनीष बंसल द्वारा उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों एवं उत्तर प्रदेश फिशरीज एक्ट, 1948 के प्रावधानों के अंतर्गत जनपद आगरा में मत्स्य संरक्षण संबंधी प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं।
जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार जनपद में अवैध मत्स्याखेट पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। प्राकृतिक जल प्रणालियों में प्रजनन योग्य मछलियों के संरक्षण के दृष्टिगत 01 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक फाई (Fry) एवं फिंगरलिंग को पकड़ने, नष्ट करने तथा बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसी प्रकार 31 अगस्त 2026 तक जनपद की नदियों में सभी प्रकार के मत्स्य आखेट पर रोक लागू रहेगी।
आदेश के अनुसार प्रजनन योग्य मछलियों के साथ-साथ 5 सेंटीमीटर से छोटे जाल से मछली पकड़ना तथा तालाब, झील एवं नदियों के जल को प्रदूषित करना भी पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
इसके अतिरिक्त 1.5 किलोग्राम से कम वजन की रोहू, नैन, कतला, कुरौंच एवं सींगी प्रजाति की मछलियों के पकड़ने एवं बेचने पर भी रोक रहेगी।मत्स्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी अवैध मत्स्याखेट पर प्रभावी नियंत्रण हेतु आवश्यक कार्रवाई करेंगे। मत्स्याखेट के लिए विभाग से विधिवत लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। मत्स्य विभाग एवं राजस्व विभाग के अधिकारी नदी किनारे स्थित केवटघाटों, वाहनों, गोदामों तथा अन्य स्थानों का निरीक्षण कर सकेंगे।
विस्फोटक अथवा विषैले पदार्थों का उपयोग कर जल को प्रदूषित करना एवं मत्स्याखेट करना पूर्णतः अवैध घोषित किया गया है। यह प्रतिबंध जनपद की समस्त जल प्रणालियों में मत्स्याखेट से संबंधित व्यापारियों, केवटघाटों एवं समितियों पर भी समान रूप से लागू रहेगा।
जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उपरोक्त प्रतिबंधों के अतिरिक्त जनपद में विदेशी थाई मांगुर (थाई कैटफिश) एवं बिगहेड मछलियों के क्रय-विक्रय पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए तथा जनसामान्य को जागरूक करने के लिए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। आदेश के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।


