श्री श्वेताम्बर जैन स्थानक महावीर भवन आगरा में चातुर्मासिक प्रवचनों में परोपकार और सम्यक दर्शन पर ज़ोर

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आगरा: श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन ट्रस्ट, आगरा के तत्वावधान में जैन स्थानक महावीर भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में पूज्य श्री आदीश मुनिजी और श्री विजय मुनिजी ने जैन धर्म के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। प्रवचनों के क्रम में मंगलवार को संतों का केश लोच कार्यक्रम भी प्रारंभ हुआ।

परोपकार से होता है पुण्योपार्जन:

हृदय सम्राट पूज्य श्री आदीश मुनिजी ने ‘सुख पाने के सूत्र’ की श्रृंखला में तेरहवें सूत्र का उद्बोधन देते हुए दूसरों का भला करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत परिवार के बड़ों की सेवा से की जा सकती है, जो हमें जीवन में ऊँचाइयों तक ले जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि जब हम दूसरों की भलाई करें, तो हमारी भावना शुद्ध होनी चाहिए।

पूज्य श्री ने जैन शास्त्रों में वर्णित हाथी और खरगोश की कथा का उदाहरण देते हुए समझाया कि करुणा और दया से किया गया कार्य निश्चित रूप से पुण्य का संचय करता है। हाथी ने अपने दयालु कार्य के कारण अगले जन्म में राजा श्रेणिक के पुत्र मेघ कुमार के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने अन्नदान, वस्त्रदान और आश्रय दान को भी पुण्य कमाने का साधन बताया। पूज्य श्री ने कहा कि यदि हम परोपकार के संस्कार डालते हैं, तो हमारा यह लोक और परलोक दोनों सँवर जाते हैं।

सम्यक दर्शन और जिनवाणी का महत्व:

श्री विजय मुनिजी ने अपने प्रवचन में कहा कि जिनवाणी सुनने से श्रोता संसार सागर से पार हो जाता है। जिनवाणी में अटल श्रद्धा रखने और सम्यक दर्शन धारण करने से बुद्धि जागृत होती है। इसके बिना जीव अनंत काल तक संसार में भटकता रहता है। उन्होंने यह भी बताया कि निंदा करना कर्म बंध का एक प्रमुख कारण है, जिससे हमें बचना चाहिए। मौन धारण करने से कभी कलह नहीं होती। उन्होंने “कम खाना, ग़म खाता और नम जाना” की कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि इससे जीवन में कभी निराशा नहीं आती और पुरुषार्थ, उदारता तथा नशीलता जैसे गुण प्राप्त होते हैं।

केश लोच कार्यक्रम का शुभारंभ:

चातुर्मासिक कार्यक्रम के तहत मंगलवार को संतों के केश लोच का कार्यक्रम भी शुरू हो गया। पूज्य रोहन मुनि का केश लोच जय मुनि ने अपने कर कमलों से किया।

जाप, त्याग और तपस्या:

धर्म सभा के अंत में गुरुदेव ने आज का जाप “श्री वासुपूज्य नाथाय नमः” की एक माला का संकल्प कराया। उन्होंने बादाम, बर्फी, बुराई न करने और झूठा न छोड़ने की शपथ दिलाई। तपस्या की कड़ी में श्रीमती सुनीता का 16वाँ, श्रीमती कंचन, श्रीमती अनोना और श्रीमती संतोष का 7वाँ उपवास जारी है। जालंधर से आए गुरु भक्त योगेश जी ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।

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