नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मकर संक्रांति के बाद बड़े बदलाव की संभावनाएं जताई जा रही हैं। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, करीब 43 वर्षों बाद गांधी परिवार के एकजुट होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन्हीं अटकलों के बीच यह कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद वरुण गांधी कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।
हाल ही में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की वरुण गांधी से मुलाकात की चर्चा ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। बताया जाता है कि वरुण गांधी के राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से रिश्ते पहले से सौहार्दपूर्ण रहे हैं और पूर्व में भी आपसी संवाद होता रहा है। माना जा रहा है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस इस दिशा में कोई बड़ा कदम उठा सकती है।
कांग्रेस जिस रणनीति के तहत यूपी में संगठनात्मक मजबूती और चुनावी तैयारी कर रही है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी बड़े राजनीतिक समीकरण गढ़ने की कोशिश में है। उल्लेखनीय है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने के बाद से वरुण गांधी भारतीय जनता पार्टी में अपेक्षाकृत हाशिये पर नजर आए हैं और सार्वजनिक रूप से भी उनकी सक्रियता सीमित रही है।
इसी बीच, संजय गांधी की पुण्यतिथि पर कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से किए गए पोस्ट को भी कई राजनीतिक विश्लेषक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं। इसे गांधी परिवार के भीतर संभावित एकजुटता से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, अतीत में राहुल गांधी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि व्यक्तिगत रिश्तों के बावजूद वैचारिक मतभेद बने हुए हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि वे वरुण गांधी से मिल सकते हैं, गले भी लग सकते हैं, लेकिन उनकी विचारधाराएं अलग हैं और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी विचारधारा से सहमत नहीं हैं।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर न तो कांग्रेस और न ही वरुण गांधी की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने आई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति, विशेषकर उत्तर प्रदेश की सियासत, किस दिशा में नया मोड़ लेती है।
