नालंदा यूनिवर्सिटी के कायाकल्प से प्रभावित हुए शशि थरूर, विदेश मंत्रालय और जयशंकर की जमकर की सराहना

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नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने बिहार में नालंदा यूनिवर्सिटी की पुनः स्थापना को लेकर विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि नालंदा यूनिवर्सिटी का पुनर्निर्माण भारत की अकादमिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पुनर्स्थापित करने की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जिसमें विदेश मंत्रालय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

मंगलवार को बिहार में आयोजित नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होने पहुंचे थरूर ने विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण किया और इसकी संरचना व अवधारणा से गहरा प्रभावित होने की बात कही। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि नालंदा यूनिवर्सिटी कैंपस एक असाधारण उपलब्धि है और इसके लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर को हार्दिक बधाई। यह विदेश मंत्रालय के उन कई गुमनाम योगदानों में से एक है, जो उच्चतम प्रशंसा के योग्य हैं।

थरूर ने स्पष्ट किया कि उनका बिहार आगमन किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि राज्य की संस्कृति और विरासत को समझने के उद्देश्य से हुआ है। उन्होंने लोगों से बिहार संग्रहालय और बापू टॉवर देखने का भी आग्रह किया। हाल के महीनों में शशि थरूर द्वारा मोदी सरकार के कुछ कदमों की सराहना किए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा भी रही है, क्योंकि यह कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग मानी जाती है।

उल्लेखनीय है कि नालंदा यूनिवर्सिटी को एक नॉन-प्रॉफिट, पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप आधारित अंतरराष्ट्रीय अकादमिक उत्कृष्टता संस्थान के रूप में स्थापित किया गया है। इसके निर्माण और संचालन में विदेश मंत्रालय ने कोऑर्डिनेशन और फंडिंग की प्रमुख भूमिका निभाई है। जुलाई 2025 में विदेश मंत्रालय ने संसद को जानकारी दी थी कि भारत ने होस्ट देश के रूप में इस परियोजना में बड़ा वित्तीय योगदान दिया है।

बिहार सरकार ने विश्वविद्यालय के लिए 455 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई, जबकि केंद्र सरकार ने 2021-22 तक स्थापना चरण के दौरान पूंजीगत और आवर्ती व्यय के लिए कुल 2,727.10 करोड़ रुपये का आवंटन किया।

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