आगरा। राज चौहान मर्डर केस में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अरबाज खान उर्फ मंसूरी को एनकाउंटर में मार गिराया है। तमंचा बरामदगी के दौरान अरबाज ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हुआ और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
डीसीपी सिटी के अनुसार, बुधवार रात गिरफ्तार किए गए अरबाज को हत्या में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी के लिए टेढ़ी बगिया क्षेत्र के कांशीराम आवास ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रात करीब दो बजे उसने एक दरोगा को धक्का देकर सरकारी पिस्टल छीन ली और पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हमले में एक आरक्षी और एक उपनिरीक्षक घायल हुए, जबकि दो अन्य अधिकारियों की जान बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से बच गई।
जवाबी फायरिंग में अरबाज के सीने और पैर में गोली लगी। उसे जिला अस्पताल से एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक, अरबाज का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है।
एक ही रात में तीन मुठभेड़ें
उसी रात पुलिस ने दो अन्य इनामी आरोपियों को भी अलग-अलग मुठभेड़ों में गिरफ्तार किया। डौकी क्षेत्र के नदोता अंडरपास के पास पुलिस पर फायरिंग करने वाले आशु तिवारी को पैर में गोली लगने के बाद पकड़ा गया। उसके पास से अवैध तमंचा, जिंदा और खोखा कारतूस बरामद हुए।
वहीं ट्रांस यमुना क्षेत्र में मोहित पंडित को घेराबंदी के दौरान मुठभेड़ में घायल कर गिरफ्तार किया गया। उसके पास से तमंचा, कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई। तीनों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
कैसे हुई थी हत्या
23 जनवरी 2026 की रात राज चौहान को चार युवक उसके घर से लेकर गए थे। बाद में टेढ़ी बगिया स्थित एक गेस्ट हाउस के बाहर उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में हत्या के पीछे पुरानी रंजिश की बात सामने आई थी।
छह दिन में खुला केस
हत्याकांड के खुलासे के लिए नौ विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया था। महज छह दिन में पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए तीनों शूटरों को निष्क्रिय कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने इसे बड़ी कामयाबी बताते हुए कहा कि शेष कानूनी कार्रवाई पूरी की जा रही है।


