आगरा, 15 जुलाई। आलू की फसल का उचित मूल्य न मिल पाने के कारण आगरा के आलू उत्पादक किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं। वे अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। लेकिन इन आलू उत्पादक किसानों के आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है। सरकार से उम्मीद थी कि चुनावी वर्ष होने के कारण कुछ सरकारी राहत मिलेगी लेकिन वहां से भी किसानों को झूठे आश्वासन का झुनझुना पकड़ा दिया गया। सरकार और उसके अफसरान मीटिंग करते रहे लेकिन आलू उत्पादक किसानों को राहत के नाम पर सिर्फ छला गया। इस आशय का एक ज्ञापन आज किसान दिवस में किसान नेताओं श्याम सिंह चाहर, लक्ष्मीनरायन बघेल, मोहन सिंह चाहर, कल्लू सिंह यादव, प्रदीप शर्मा, मुकेश पाठक, सोमवीर यादव, ने दिया।
हाल ये है कि किसान कोल्ड स्टोर भाड़े में 250 रुपये सब्सिडी की मांग लंबे समय से करते चले आ रहे हैं लेकिन सरकारी अमले के कान पर जूं तक नहीं रेंगा। यही हाल रहा तो आगरा के आलू उत्पादक किसान आलूपैदा करना ही बंद कर देंगे।
उन्होंने कहा कि हम आलू उत्पादकों को विगत कई वर्षोें से लगातार घाटा उठाना पड रहा है। हम लोग सरकार से लगातार मांग करते आ रहे हैं कि बीज, खाद और कोल्ड स्टोर के भाड़े में सब्सिडी दे दी जाए। जिससे आलू उत्पादक घाटे में तो नहीं रहेंगे। अभी तो हम किसानों को ब्याज पर कर्जा लेकर आलू की फसल करनी पड़ रही है। हर साल घाटा हो रहा है। सरकार से मांग है कि आलू उत्पादक किसानों के केसीसी ऋण ब्याज समेत माफ किये जाएं।
किसान नेताओं ने ज्ञापन में कहा कि सरकारी स्तर से फल-फूल ,सब्जी के बीज नकली जबरन थोप दिये जाते हैं। नतीजा यह होता है कि किसानों की फसल बर्बाद हो जाती है। हमारी मांग है कि किसानों को जबरन फल-फूल,सब्जी के बीज न थोपे जाएं और सराकरी छूट का लाभ सीधे किसानों के खाते में भेजा जाए।
अच्छी फसल के लिये कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध करायी जाने वाली दवाओं में भी गड़बड़ी रहती है, इसे रोका जाए। हमारी मांग है कि उच्च कोटि की कंपनियों से ये दवाएं सीधे खरीदी जाएं और पात्र किसानों को पौस मशीन द्वारा वितरित की जाएं।


