अमृतवेला में बरसा नाम का अमृत,  गुरुवाणी की मधुर स्वर-लहरियों से भक्तिमय हुआ कीर्तन समागम

Press Release उत्तर प्रदेश

आगरा। भोर की पावन अमृतवेला, वातावरण में घुली भीनी-भीनी खुशबू और गुरुवाणी की सुरीली स्वर-लहरियों की गूंज—यह अलौकिक दृश्य था सुखमनी सेवा सभा द्वारा अमर होटल में आयोजित भव्य कीर्तन समागम का, नववर्ष के शुभ अवसर पर आयोजित इस दिव्य कीर्तन दरबार में बड़ी संख्या में संगत ने सहभागिता कर गुरु महाराज के चरणों में अपना तन-मन-श्वास अर्पित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अमृतवेला में समूह संगत द्वारा श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ सुखमनी साहिब जी के पाठ से हुआ, इसके पश्चात नन्हे बालक संजम सिंह ने अपनी मधुर रसना से भावपूर्ण सिमरन प्रस्तुत कर समस्त संगत का मन मोह लिया।
इसके उपरांत हरमन प्यारे वीर महेंद्र पाल सिंह ने अमृतमयी गुरुवाणी कीर्तन एवं प्रेरणादायक विचारों के माध्यम से संगत को एकरस कर दिया, उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि संगत में आकर गुरु महाराज के चरणों से जुड़ना भी आवश्यक है और टूटना भी—
जुड़ना है नम्रता से, टूटना है अहंकार से;
जुड़ना है प्रेम से, टूटना है नफरत से;
जुड़ना है गुरु की वडियाई से, टूटना है निंदा और ईर्ष्या से,
उन्होंने सर्वप्रथम गुरुवाणी शब्द “शेख फरीदे खैर दीजै बंदगी” का अत्यंत भावपूर्ण गायन कर संगत को भावविभोर किया तथा संदेश दिया कि जब गुरु की बंदगी मिल जाए, तो फिर किसी अन्य मांग की आवश्यकता नहीं रहती, इसके पश्चात “ऐथै ओथै रखवाला” शब्द का गायन किया, संगत की विशेष फरमाइश पर अंत में “प्रभ जीओ खसमाना कर प्यारे” शब्द का गायन कर समूचे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस पावन अवसर पर सरदार अमरदेव सिंह साहनी, रंजीत सामा, रमन साहनी,कवलजीत सिंह, गुरु सेवक श्याम भोजवानी, राजू सलूजा, बंटी ओबरोय, हरपाल सिंह,सतीश सिंह अरोड़ा, संजय जटाना,मलकीत सिंह,रिंकू गुलाटी, कुलदीप सिंह, बबलू व्यानी, हितेश धर्मानी, गोरु भाई,दलजीत सिंह दुग्गल, अरविंद सिंह पप्पी, संजय नोतनानी, अशोक अरोड़ा, विनोद सचदेवा, स्वीटी कालरा, संजय सेठ, शंटी आनंद, मनप्रीत सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। ज्ञानी अमरीक सिंह द्वारा अरदास के उपरान्त गुरु महाराज जी के अटूट लंगर का वितरण किया गया।  जिसे संगत ने बड़े प्रेम, श्रद्धा एवं भाव के साथ ग्रहण किया। अंत में साहनी परिवार द्वारा समस्त संगत एवं सुखमनी सेवा सभा का हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

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