इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लेकर गृह मंत्री ने रखी अपनी राय

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लेकर अपनी राय रखी है. एक टीवी इंटरव्यू के दौरान शाह ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस बॉन्ड को असंवैधानिक क़रार देने के बजाय इसमें सुधार लाने की कोशिश करनी चाहिए.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अमित शाह ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड को राजनीति से काले धन की भूमिका ख़त्म करने के लिए लाया गया था.

उन्होंने कहा, ”सभी को सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को स्वीकार करना होगा. मैं सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का पूरा सम्मान करता हूं, लेकिन मेरा मानना है कि इसे पूरी तरह ख़त्म करने के बजाय, इसमें सुधार करना चाहिए था.”

सुप्रीम कोर्ट ने 14 फरवरी को इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक क़रार दिया था.

अदालत ने इसके अलावा इस बॉन्ड का प्रबंधन करने वाले भारतीय स्टेट बैंक से सभी ख़रीदे और भुनाए गए बॉन्डों की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा था.

अधीर रंजन चौधरी ने सरकार से की ये मांग

इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार को शर्मिंदा होना चाहिए और उसे माफ़ी मांगनी चाहिए.
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “सरकार को सुप्रीम कोर्ट में माफ़ी मांगनी चाहिए कि क़ानून के दिग्गज जानकारों के प्रयासों के बावजूद अदालत ने इसे असंवैधानिक क़रार दिया है.”

उनके अनुसार “सदन में जिस दिन अरुण जेटली वित्त विधेयक के रूप में इलेक्टोरल बॉन्ड का क़ानून लेकर आए थे, हम उसी दिन से इसका विरोध कर रहे हैं.”

“हमारा विरोध उसी दिन से है, जिस दिन से चोरी-छिपे पिछले दरवाज़े से, डरा कर-धमका कर सत्तारूढ़ पार्टी अपनी जेब भरने की कोशिश करते हुए ये जो इलेक्टोरल बॉन्ड लाए, इसका विरोध हम बराबर करते आ रहे हैं.”

अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “आज हम न्यायपालिका और न्यायाधीशों को तहेदिल से आभार जताना चाहूंगा. इस क्रांतिकारी क़दम के कारण सारे देश में ये साबित हो चुका है कि बहुमत के बाहुबल के दम पर चाहे कुछ भी कर लें, लेकिन हमारे देश की न्यायपालिका किसी अनर्थ या गैरकानूनी कामों को अभी भी रोकने के काबिल है.”

-एजेंसी

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