आगरा। सब्जी के राजा आलू की बेकदरी सरकार द्वारा की जा रही है। किसानों को आलू उत्पादन में लागत बहुत अधिक लगानी पड़ रही है जबकि बाजार मूल्य बहुत कम है। ऐसा है जैसे कि ऊंट के मुंह में जीरा। इसके कारण आलू उत्पादक किसान भुखमरी के कगार पर पहुंचते जा रहे हैं। ऐसा केवल आगरा जनपद ही नहीं पूरे प्रदेश में है, जहां आलू उत्पादन होता है। सरकार द्वारा इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिये। आलू उत्पादक किसानों को सब्सिडी दी जाए। जिससे आलू किसानों को कुछ राहत मिल सके। महोदय निवेदन है कि आलू का बाजार मूल्य बढ़ाया जाए, जिससे किसानों को उनकी लागत का अच्छा मूल्य मिल सके।
आगरा मंडल जैसे आलू उत्पादक क्षेत्र में आलू प्रसंस्करण इकाई लगायी जाएं। इसकी मांग हम किसान लंबे समय से करते आ रहे हैं। पूर्व में इसकी घोषणा भी तत्कालीन प्रधानमंत्री तक कर चुके हैं। लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात ही रहा है। आलू उत्पादक किसानों को बचाना है तो बीज, खाद से लेकर पेस्टीसाइड तक कम मूल्य पर उपलब्ध कराये जाएं। साथ ही आलू फसल को बेचने की पूरे देश भर में व्यवस्था की जाए। जिससे आलू किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके। इस संबंध में एक ज्ञापन ताज सिटी आगरा आलू उत्पादक समिति के प्रदेश महासचिव लक्ष्मीनरायन बघेल ने आज जिलाधिकारी आगरा को दिया। ज्ञापन देने वालों में जाहर सिंह, मुकेश पाठक आदि थे।


