आलू का बाजार मूल्य बढ़ाये जाने की मांग, आलू भंडारण की दर घटायी जाए

Press Release उत्तर प्रदेश

आगरा, 18 फरवरी। सब्जी के राजा आलू की बेकदरी हो रही है। किसानों को आलू उत्पादन में लागत बहुत अधिक लगानी पड़ी है जबकि बाजार मूल्य बहुत कम है। ऐसा है जैसे कि ऊंट के मुंह में जीरा। इसके कारण आलू उत्पादक किसान भुखमरी के कगार पर पहुंचते जा रहे हैं। ऐसा केवल आगरा जनपद ही नहीं पूरे प्रदेश में है, जहां आलू उत्पादन होता है। सरकार द्वारा इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिये। आलू उत्पादक किसानों को सब्सिडी दी जाए। जिससे आलू किसानों को कुछ राहत मिल सके। इस आशय का एक ज्ञापन ताज सिटी आगरा आलू उत्पादक समिति के प्रदेश महासचिव लक्ष्मीनरायन बघेल, किसान नेता श्याम सिंह चाहर, लाखन सिंह त्यागी, चेतराम, प्रदीप कुमार, चंद्रभान सिंह, एन के सिंह आदि ने किसान दिवस में मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह को दिया।

ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि आलू का बाजार मूल्य बढ़ाया जाए, जिससे किसानों को उनकी लागत का अच्छा मूल्य मिल सके। आज की तारीख में आलू किसान अपनी फसल का उत्तम कोटि का आलू 4 से 5 रुपये किलोग्राम बेच रहा है। जबकि इसके उत्पादन में लागत 10 रुपये किलोग्राम की बैठ रही है। ऊपर से किसान की हाड़तोड़ मेहनत अलग है।
महोदय हम आलू किसान अपनी फसल की और खुद की बेकदरी से सरकार और अफसरशाही को सैकड़ों नहीं हजारों बार अवगत करा चुके हैं। परंतु हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। महोदय यही हाल रहा तो एक दिन ऐसा आएगा, कि किसान आलू पैदा करना ही छोड़ देंगे। इसलिये आलू किसानों को बचाना है तो आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए। आगरा मंडल जैसे आलू उत्पादक क्षेत्र में आलू प्रसंस्करण इकाई लगायी जाएं। देशव्यापी फसल बेचने के लिये ट्रक से लेकर ट्रेन और हवाई सुविधा तक प्रदान की जाए। जिससे आगरा का आलू किसान कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक कहीं भी अपनी फसल को अच्छे दामों पर बेच सके।
आलू उत्पादक किसानों को बचाना है तो बीज ,खाद से लेकर पेस्टीसाइड तक कम मूल्य पर उपलब्ध कराये जाएं। आलू भंडारण की दरें निर्धारित करने का अधिकार जो कोल्ड स्टोर स्वामियों को दिया गया है, उसे निरस्त कर शासन अपने हाथ में ले। साथ ही कोल्ड स्टोर मेें आलू भंडारण के लिये सरकारी छूट सीधे किसानों के खातों में दी जाए न कि शीतगृह स्वामियों को दी जाए। इससे आलू किसानों को कुछ हद तक राहत तो मिलेगी।

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