आगरा। जिला आगरा के तहसीलदार फतेहाबाद द्वारा धनगर जाति प्रमाण पत्र निरस्त किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिवक्ता राजेश कुमार तिवारी द्वारा प्रभावी पैरवी करने के बाद कोर्ट ने आदेश की समीक्षा की और इसे मनमाना एवं संदिग्ध करार दिया। साथ ही तहसीलदार के निर्णय में दुर्भावना की आशंका भी जताई है।
हाईकोर्ट ने तहसीलदार फतेहाबाद (जिला आगरा) को 19 जनवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर अपने इस निर्णय का स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना कारण बताए जाति प्रमाण पत्र रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।


