बुजुर्गों को भी बालपन का अहसास कराती हैं बाल कविताएं , शरद गुप्त के बाल काव्य संग्रह का विमोचन

Press Release उत्तर प्रदेश

नागरी प्रचारिणी सभा में साहित्यकारों का हुआ समागम

आगराः बाल साहित्यकार डा.शशि गोयल ने कहा है कि बाल कविताएं बुजुर्गों को भी बाल्यकाल का अहसास कराती हैं। वहीं बच्चों के जीवन में एक दिशा भी प्रदान करती हैं। इसलिए बाल साहित्य का सृजन बहुत आवश्यक है।नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा साहित्यसेवी शरद गुप्त की द्वितीय साहित्यिक कृति ‘नन्ही नन्नू की नन्ही दुनिया’ बाल काव्य संग्रह का विमोचन पुस्तकालय भवन में किया गया। मुख्य अतिथि डा.शशि गोयल थीं। उन्होंने कहा कि बाल साहित्य पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए नागरी प्रचारिणी सभा के सभापति डा.खुशीऱाम शर्मा ने कहा कि शरद की बाल काव्य संग्रह में साहित्य, कला, संस्कृति, पर्व, त्योहार और महोत्सवों की झलक मिलती है।
समीक्षा करते हुए साहित्यकार डा.आर.एस.तिवारी शिखरेश ने कहा कि बाल साहित्य सृजन के लिए कवि को परकाया प्रवेश करना पड़ता है, यानि अपने मन को बच्चा बनाना पड़ता है, तब यह सृजन होता है।
केंद्रीय हिंदी संस्थान की पूर्व निदेशक डा.बीना शर्मा ने भी काव्य संग्रह पर विस्तृत विचार व्यक्त किए। शरद गुप्ता का परिचय आगरा कालेज के पूर्व प्राचार्य डा.विनोद माहेश्वरी ने दिया। शरद गुप्ता ने अपने काव्य संग्रह के बारे में जानकारी दी। नागरी प्रचारिणी सभा के मंत्री डॉ चंद्रशेखर शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।साहित्यसेवी संजय गुप्त ने आभार व्यक्त किया। संचालन डा.कमलेश नागर ने किया। डा.मधुरिमा शर्मा, डा.सुनीता चौहान, डा.आभा चतुर्वेदी, डा वत्सला प्रभाकर, नितिन जौहरी, डॉ आनंद राय,शेषपाल सिंह शेष, ब्रजबिहारी बिरजू,

रामेंद्र शर्मा रवि, दिलीप रघुवंशी, आचार्य यादराम सिंह कवि किंकर, आचार्य उमाशंकर पाराशर, रमेश पंडित, प्रकाश गुप्ता बेबाक, प्रेम राजावत , डॉ रमेश आनंद, सुधीर शर्मा, देवांश , मुकुल, पवन गुप्ता, एस के बग्गा, गीतिका, रेखा आदि मौजूद रहे।

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