आगरा। शहर के औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक शैलेन्द्र सिंह ने नेशनल चैम्बर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की। चैम्बर सभागार में आयोजित इस बैठक में औद्योगिक नीति, निर्यात प्रोत्साहन, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड और ताज संरक्षित क्षेत्र में उद्योगों की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल ने की, जबकि औद्योगिक विकास एवं डीआईसी प्रकोष्ठ के चेयरमैन नरेन्द्र तनेजा के नेतृत्व में उद्योग प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। हाल ही में पदभार ग्रहण करने पर शैलेन्द्र सिंह का स्वागत भी किया गया।
निर्यात बढ़ाने पर जोर
महाप्रबंधक शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार की मंशा आगरा के उद्योगों को मजबूत आधार देना है। उन्होंने साफ किया कि स्थानीय इकाइयों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के प्रयास तेज किए जाएंगे। इसी कड़ी में चैम्बर के सहयोग से जल्द ही बड़े स्तर पर बायर-सेलर मीट आयोजित करने की बात भी कही गई, ताकि निर्यात को ठोस समर्थन मिल सके।
योजनाओं की जानकारी अब नियमित
चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल ने मांग रखी कि सरकार की सभी औद्योगिक योजनाओं की जानकारी नियमित रूप से ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए। महाप्रबंधक ने इस पर सहमति जताई और कहा कि सूचना का प्रवाह व्यवस्थित किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक उद्यमी लाभान्वित हो सकें।
कॉमन फैसिलिटी सेंटर और समाधान दिवस
लघु और मध्यम उद्योगों को तकनीकी व आधारभूत सहायता देने के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर को दोबारा शुरू करने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए महाप्रबंधक ने सप्ताह में एक दिन ‘समाधान दिवस’ आयोजित करने की घोषणा की, जहां उद्योगों की लंबित समस्याओं की सुनवाई और निस्तारण किया जाएगा।
फ्रीहोल्ड और टीटीजेड की समस्याएं
औद्योगिक आस्थानों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड करने की मांग पर शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि चैम्बर द्वारा भेजे जाने वाले प्रस्ताव को शासन स्तर पर अग्रसारित किया जाएगा।
ताज संरक्षित क्षेत्र में संचालित इकाइयों को आ रही तकनीकी और वैधानिक दिक्कतों पर भी चर्चा हुई। महाप्रबंधक ने भरोसा दिलाया कि इन मुद्दों को उच्च स्तर पर उठाकर समाधान का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में उद्योग जगत से जुड़े कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। कुल मिलाकर बैठक में प्रशासन और उद्योग संगठन के बीच बेहतर समन्वय की तस्वीर दिखी। अब उद्योग जगत की नजर इस बात पर है कि किए गए आश्वासन कितनी तेजी से अमल में आते हैं।
