आगरा। आस्था, परंपरा और जल-संरक्षण का अनुपम संगम बुधवार को तब देखने को मिला, जब श्रीमनःकामेश्वर मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन कुएं का विधिवत जीर्णोद्धार उपरांत पूजन एवं लोकार्पण संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के बीच हुए इस आयोजन ने न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर को पुनर्जीवित किया, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत परंपराओं को भी नई ऊर्जा प्रदान की।
इस अवसर पर मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने श्रीमनःकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी के सान्निध्य में ऐतिहासिक कुएं का पूजन कर लोकार्पण किया। समारोह के दौरान पूरे परिसर में मंत्रध्वनि और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
मंदिर मठ के प्रशासक हरिहर पुरी ने रामेश्वर से विशेष रूप से लाए गए 22 पवित्र कूपों का जल इस कुएं में प्रवाहित किया। इस धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही कुआं एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक स्मृति का सजीव प्रतीक बन गया।
मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्राचीन कुएं हमारी सांस्कृतिक पहचान और जल-संरक्षण की परंपरा के सशक्त उदाहरण हैं। श्रीमनःकामेश्वर मंदिर मठ द्वारा किया गया यह कार्य केवल संरचनात्मक जीर्णोद्धार नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए विरासत को सुरक्षित रखने का संकल्प है। यह पहल समाज को जल-संरक्षण के प्रति भी जागरूक करेगी।
महंत योगेश पुरी ने बताया कि यह कुआं कभी विवाह, संस्कार और विविध धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख केंद्र रहा है। समय के साथ इसकी उपयोगिता सीमित हो गई थी, लेकिन अब शहर के मध्य इस ऐतिहासिक कुएं के पुनः संचालन से प्राचीन परंपराएं फिर से जीवंत होंगी। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा चलाए जा रहे जल-संरक्षण अभियानों की भावना के अनुरूप बताया।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने जीर्णोद्धार के पीछे की प्रेरणा साझा करते हुए कहा कि रामायण सर्किट यात्रा के दौरान नंदीग्राम में 27 तीर्थों के जल से श्रीराम के राज्याभिषेक की परंपरा ने उन्हें अत्यंत प्रेरित किया। उसी भावना से प्रेरित होकर मंदिर परिसर के बंद पड़े कुएं को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि जैसे पश्चिमी देशों में प्राचीन जल स्रोत पर्यटन के आकर्षण होते हैं, उसी प्रकार यह कुआं भी आगरा आने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटकों के लिए विशेष केंद्र बनेगा। इस ऐतिहासिक कार्य में अमर गुप्ता और विजय सिंह के सहयोग की भी सराहना की गई।
