आगरा मंडल द्वारा रेल संरक्षा को सुदृढ़ करने एवं अधोसंरचना में निरंतर सुधार के लिए विभिन्न तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आगरा मंडल के मथुरा रेलखंड के होडल यार्ड में क्रॉसओवर संख्या 201/A-B के लेआउट सुधार का महत्वपूर्ण कार्य 19 सितंबर 2026 को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
क्रॉसओवर संख्या 201/A-B अप मेन लाइन को डाउन मेन लाइन से जोड़ता है। तकनीकी निरीक्षण एवं गणना के दौरान क्रॉसओवर की वास्तविक लंबाई 91.845 मीटर पाई गई, जबकि डिजाइन के अनुसार इसकी निर्धारित लंबाई 93.145 मीटर थी। इस प्रकार 1.30 मीटर की कमी पाई गई, जिसके कारण क्रॉसओवर के एक हिस्से में किंक की स्थिति थी। IRICEN सॉफ्टवेयर के माध्यम से की गई तकनीकी गणना से भी इस कमी की पुष्टि हुई।
रेल संरक्षा की दृष्टि से इस कमी को दूर करने के लिए मुख्यालय से इंजीनियरिंग,सिग्नल एवं दूरसंचार तथा टीआरडी विभाग को शामिल करते हुए संयुक्त ब्लॉक स्वीकृत किया गया। निर्धारित ब्लॉक के दौरान T-28 मशीन की सहायता से प्वाइंट संख्या 201B को मथुरा छोर की ओर 1.30 मीटर स्थानांतरित किया गया। इस सुधार के फलस्वरूप क्रॉसओवर का लेआउट निर्धारित डिजाइन के अनुरूप हो गया तथा किंक की स्थिति समाप्त कर दी गई।
कार्य के दौरान टर्नआउट संख्या 201B में पूर्व में अनुपलब्ध तीन लॉन्ग स्लीपर, स्लीपर संख्या 81, 82 एवं 83 भी लगाए गए। साथ ही स्लीपरों की स्पेसिंग को निर्धारित टर्नआउट मानकों के अनुरूप किया गया। इसके परिणामस्वरूप क्रॉसओवर की लंबाई 91.845 मीटर से बढ़कर निर्धारित 93.145 मीटर हो गई।
यह कार्य इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं दूरसंचार, टीआरडी एवं परिचालन विभाग सहित संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने आपसी समन्वय के साथ निर्धारित ब्लॉक अवधि में कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया।
लेआउट सुधार के पश्चात क्रॉसओवर के अंतिम अलाइनमेंट को सुनिश्चित करने के लिए 20 सितंबर 2026 को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यूनिमैट टैम्पिंग का कार्य भी किया गया।
इस लेआउट सुधार कार्य से क्रॉसओवर की 1.30 मीटर की कमी दूर हुई, किंक समाप्त हुआ तथा आवश्यक लॉन्ग स्लीपर उपलब्ध कराकर स्लीपर स्पेसिंग को निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया। इससे क्रॉसओवर की ट्रैक ज्योमेट्री में सुधार हुआ है और रेल यातायात के सुरक्षित एवं सुचारु संचालन में सहायता मिलेगी।
इस कार्य से यात्रियों एवं रेलवे दोनों को लाभ मिलेगा। बेहतर ट्रैक ज्योमेट्री, मानक के अनुरूप टर्नआउट एवं स्लीपर स्पेसिंग तथा किंक के उन्मूलन से ट्रैक की संरक्षा, विश्वसनीयता एवं स्थायित्व में सुधार होगा। इससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित एवं सुचारु रूप से सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही, ट्रैक परिसंपत्ति के रखरखाव एवं बेहतर प्रबंधन में सुविधा होगी तथा भविष्य में परिचालन संबंधी व्यवधानों को कम करने में मदद मिलेगी।यह कार्य आगरा मंडल द्वारा संरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेल अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ एवं बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह एवं मंडल रेल प्रबंधक, आगरा श्री गगन गोयल के मार्गदर्शन एवं दिशा-निर्देशन में यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।


