आगरा, 1 अगस्त। एकलव्य स्टेडियम को पता नहीं किसकी नजर लग गयी है। खेल की पावन स्थली पर पुलिस किसी बड़े आयोजन के दौरान ही दिखायी पड़ती थी। उसी पुलिस की दखलंदाजी लगातार बढ़ती जा रही है। कभी खिलाड़ी पुलिस को बुला लेते हैं तो कभी खिलाड़ियों के अभिभावक थाना सदर पुलिस के पास तहरीर लेकर पहुंच जाते हैं। आखिर यह सब हो क्या रहा है। कहीं खेलकूद जैसी पावनस्थली को बदनाम करने की साजिश तो नहीं रची जा रही है अथवा यह एक दुर्योग ही कहा जाए।
कुछ समय पहले कबड्डी की खिलाड़ियों के मध्य विवाद हुआ। मारपीट तक हो गयी। यह मामला लखनऊ तक पहुंच गया। एक लंबे समय से चल रहा यह शीतयुद्ध अभी तक समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। इसमें एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार चल रहा है। लखनऊ में बैठे आला अफसरों के संज्ञान में पूरा मामला है लेकिन वे भी इसे हल नहीं करना चाह रहे हैं।
दूसरा विवाद लगभग एक हफ्ते पहले का ही है। फुटबाल के खिलाड़ी एकलव्य स्टेडियम के मैदान में खेल रहे थे। तभी बालिका खिलाड़ी की फुटबाल बालकों की तरफ चली गयी। इस बालिका ने कहा कि प्लीज ये फुटबाल इधर दे दो। एक बालक फुटबाल को दे ही रहा था कि दूसरे ने रोक दिया कि वे अपने आप ले जाएंगी। इस पर बालिका ने कुछ अपशब्द कह दिया। बस इसी बात पर इन बालक खिलाड़ियों ने 112 नंबर पर डायल कर पुलिस बुला ली। पुलिस ने कोच योगेश वर्मा से पूछताछ की। मामला आगरा फुटबाल संघ के अध्यक्ष बिल्लू चौहान तक पहुंचा। उन्होंने किसी तरह मामले को शांत कराया।
तीसरा विवाद जिमनास्टिक हाल में हुआ।वहां के एक कोच पर खिलाड़ी ने तमाम तरह के आरोप लगा डाले। मामला पुलिस तक पहुंच गया। यह मामला थमा भी नहीं था कि कल एक
चौथा मामला एकलव्य स्टेडियम के टेबिल टेनिस हाल का सामने आ गया । यहां के छात्रावास का एक ट्रेनी लापता हो गया। अभिभावकों ने पुलिस में मामला दर्ज करा दिया। पुलिस के पास मामला पहुंचते ही खबर अखबार नवीसों के पास पहुंच गयी। उन्होने लंबी-चौड़ी खबर छापीं। आगरा के खेल प्रेमियों को भारी निराशा हुई। बदनामी खेलकूद की और इनकी संस्था की हुई। आखिर इस सबके लिये कौन दौषी है। पहले तो इस तरह के मामले न के बराबर होते थे। अब आये दिन आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। इसको रोका जाना जरूरी है। अन्यथा अभिभावक अपने बच्चों को खेलने के लिये हास्टलों में नहीं भेजेंगे।


