भारत में अमेरिकी अधिकारियों की सक्रियता तेज, पुतिन की यात्रा के तुरंत बाद कूटनीतिक हलचल बढ़ी

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नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के तुरंत बाद अब अमेरिका की ओर से उच्च-स्तरीय दौरों का सिलसिला शुरू हो गया है। अमेरिका की उप विदेश मंत्री (राजनीतिक मामले) एलिसन हुकर 7 से 11 दिसंबर तक भारत में हैं। वह नई दिल्ली और बेंगलुरु में भारतीय अधिकारियों से मुलाकात कर रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक संबंध और उभरती तकनीकों में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगी।

अमेरिका और भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने के करीब हैं, जिससे अमेरिकी टैरिफ में कमी की उम्मीद है। अमेरिका भारत को अपने निर्यात में बढ़ोतरी देना चाहता है और एआई, अंतरिक्ष अनुसंधान तथा ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

नई दिल्ली और बेंगलुरु में महत्वपूर्ण बैठकें

अपनी यात्रा के दौरान एलिसन हुकर भारत के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर बातचीत करेंगी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ विदेश कार्यालय परामर्श में भाग ले सकती हैं। बेंगलुरु में इसरो का दौरा कर अंतरिक्ष क्षेत्र के वैज्ञानिकों और उद्योग से जुड़े प्रमुखों से मुलाकात कर सकती हैं। इसका उद्देश्य अनुसंधान में साझेदारी बढ़ाने और नए द्विपक्षीय अवसरों को तलाशना है।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों का लगातार दौरा

एलिसन हुकर की यात्रा के बाद, 10 दिसंबर को अमेरिका का एक और प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचेगा, जो प्रस्तावित व्यापार समझौते से जुड़े वार्ता दौर को आगे बढ़ाएगा। इसी सप्ताह अमेरिकी उप व्यापार प्रतिनिधि रिक स्विट्जर और उनकी टीम भी भारत में होंगी।

ये यात्राएँ ऐसे समय हो रही हैं जब भारत और अमेरिका व्यापार सौदे को अंतिम रूप देने के बहुत करीब माने जा रहे हैं। इंडस्ट्री मंत्री पीयूष गोयल भी हाल में संकेत दे चुके हैं कि दोनों देशों के बीच समझौते पर सहमति बनने वाली है।

टैरिफ में राहत की उम्मीद

ट्रंप प्रशासन ने भारत के रूसी कच्चे तेल आयात में वृद्धि को लेकर 50% तक टैरिफ लगाए थे। अब अमेरिका चरणबद्ध व्यापार सौदे पर काम कर रहा है, जिसके पहले चरण में इन जवाबी टैरिफ का समाधान शामिल है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रूसी तेल आयात कम करने के प्रयासों की प्रशंसा कर चुके हैं और संकेत दिया था कि भारतीय उत्पादों पर टैरिफ जल्द कम किए जा सकते हैं।

अमेरिका वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ऊँचे टैरिफ से कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर और आभूषण उद्योग प्रभावित हुए हैं, जिससे व्यापार समझौते की आवश्यकता और बढ़ गई है।

रूस भी बढ़ा रहा भारत से व्यापार संबंध

उधर रूस भी भारत के साथ व्यापारिक संभावनाओं को मजबूत करने में जुटा है। रूस के उद्योगपतियों और उद्यमियों के संघ (RSPP) के उपाध्यक्ष सर्गेई क्रास्निलनिकोव ने बताया कि पुतिन ने रूसी आयातकों को भारत से आयात बढ़ाने का स्पष्ट संदेश दिया है। रूस को लगभग 50 लाख कुशल कर्मचारियों की जरूरत है, जिसे पूरा करने में भारत की बड़ी भूमिका हो सकती है।

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