यूपी: भ्रष्टाचारियों की भेंट चढ़ा ‘हर घर शुद्ध जल’ का दावा, आखिर कौन करेगा जांच?

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लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना के जरिए ‘हर घर शुद्ध जल’ पहुंचाने का दावा था। अधिकारियों ने कंपनियों की मिलीभगत से खूब आंकड़े भी पेश किए लेकिन ये सिर्फ कागजी ही दिख रहे हैं। दरअसल, प्रदेश के ज्यादातर घरों में पानी के लिए विभाग की तरफ से टोटी लगा दी गयी है लेकिन उसमें जल कब आयेगा इसका पता हीं नहीं। यही नहीं कई जगहों पर पानी की टंकी नहीं बन पाई तो कहीं पानी सप्लाई के लिए पाइप तक नहीं बिछ पाई।

ऐसे में अब अधिकारियों और कंपनियों के भ्रष्टाचार की कलई खुलने लगी। सबसे बड़ी बात ये है कि इलेक्ट्रोरल बॉन्ड के जरिए करोड़ों रुपयों का चंदा देने वाली मेघा कंपनी भी ‘जल जीवन मिशन’ योजना में काम कर रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जब इलेक्ट्रोरल बॉन्ड के जरिए कंपनियों ने चंदा दिया है तो उनके काम की गति और गुणवत्ता क्या होगी?

अधिकारियों ने की वसूला कमीशन!

सूत्रों की माने तो यूपी ‘जल जीवन मिशन’ में काम कर रही कंपनियों से अधिकारियों ने कमीशन के नाम पर जमकर वसूली भी की। सूत्रों की माने तो ये वसूली करीब 7 प्रतिशत तक इनके द्वारा की गयी। लिहाजा, कंपनी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में अपने मन मुताबिक काम कर रही हैं और लोगों तक शुद्ध जल पहुंचाने का सपना भी धूंधला होता दिख रहा है।

अधिकारियों और उनके करीबियों ने की जमकर वसूली

बताया जाता है कि, इस काम में हो रही लापरवाही में सबसे ज्यादा अधिकारियों पर सवालिया निशान लग रहे हैं। अधिकारियों और कंपनियों के बीच हुई सांठगांठ से सरकार तक सिर्फ आंकड़े पहुंच रहे हैं लेकिन सरकार जमीनी हकीकत से रूबरू नहीं हो पा रही है। सूत्र ये भी बताते हैं कि इन कंपनियों से काम के बदले मोटी कमीशन अधिकारी और उनके करीबियों ने वसूली है। प्रदेश में कंपनियों से कमीशन लेने वालों में ‘सिंह’, ‘अनु..’ ‘वि..’, ‘राजे…’, ‘शुक्ला..’, ‘गुरू…’ समेत कई नाम हैं। सूत्रों का कहना है कि सरकार इनकी जांच कराए तो ऐसे अधिकारियों और उनके करीबियों की कलई खुल जाएगी।

-agency

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