यूपी की वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ नाम गायब: सियासी गलियारों में हाहाकार, BJP को सताया ‘कोर वोटर’ कटने का डर, CM योगी ने संभाली कमान

Politics

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने को लेकर विपक्ष जहां इसे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की साजिश बता रहा है, वहीं भाजपा खुद इस बात से टेंशन में है कि कटे नामों में उसके समर्थक ज्यादा हो सकते हैं। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं और वैध मतदाताओं के नाम दोबारा जुड़वाने के निर्देश दे दिए हैं।

6 जनवरी को जारी हुई ड्राफ्ट सूची

6 जनवरी को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इसके चलते प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 15.44 करोड़ से घटकर 12.55 करोड़ रह गई है। विपक्षी दल इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहे हैं, जबकि भाजपा नेताओं का मानना है कि हटाए गए नामों में पार्टी के कोर वोटर अधिक हैं, जिससे आगामी चुनावों में नुकसान हो सकता है।

एसआईआर के आंकड़ों ने बढ़ाई बेचैनी

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि एसआईआर के तहत बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर सर्वे किया। इस दौरान 46.23 लाख मृत मतदाता, 2.17 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता और 25.47 लाख डुप्लीकेट मतदाता पाए गए। ड्राफ्ट सूची में 81.30 प्रतिशत नाम बरकरार रखे गए, जबकि 18.70 प्रतिशत नामों की कटौती ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया।

2027 चुनाव को लेकर भाजपा सबसे ज्यादा चिंतित

भाजपा को आशंका है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से 2027 के विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशत और सीटों पर असर पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं कि हटाए जा रहे मतदाताओं में 85 से 90 प्रतिशत भाजपा समर्थक हो सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने प्रदेश के करीब 1.62 लाख बूथों पर फॉर्म-6 का वितरण शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता घर-घर जाकर नए मतदाताओं, 18 वर्ष पूरे कर चुके युवाओं, शादी के बाद पता बदलने वाली महिलाओं और नए बसे लोगों के नाम जुड़वाने में जुटे हैं।

सीएम योगी ने बुलाई अहम वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक

ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार शाम भाजपा से जुड़े सभी पदाधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक बुलाई। बैठक में प्रदेश, जिला स्तर के संगठन पदाधिकारी, सांसद और विधायक शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पहली सूची में जिन भी वैध मतदाताओं के नाम कटे हैं, उन्हें हर हाल में फिर से जुड़वाया जाए।

मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को मैदान में उतरने के निर्देश

सीएम योगी ने सांसदों, विधायकों और मंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बूथ स्तर तक जाकर इस अभियान की निगरानी करें। उन्होंने निर्देश दिए कि पात्र मतदाताओं के नाम फॉर्म भरवाकर सूची में शामिल कराए जाएं, जबकि अपात्र या डुप्लीकेट नामों पर आपत्ति दर्ज कराकर हटवाया जाए।

मुख्यमंत्री के अनुसार इससे लोकतंत्र मजबूत होगा और चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। दावा-आपत्ति की अवधि 6 जनवरी से 6 फरवरी तक है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को जारी होगी।

विधायक और प्रवक्ताओं के बयान

गोंडा की तरबगंज विधानसभा से विधायक प्रेम नारायण पांडेय ने कहा कि बूथ स्तर पर निगरानी कर छूटे हुए नामों को जुड़वाया जाए और गलत नामों पर आपत्ति दर्ज कराई जाए, ताकि चुनाव प्रक्रिया सुचारु हो सके।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ल ने कहा कि यह अभियान पारदर्शिता और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए है। पार्टी के कार्यकर्ता दिन-रात मेहनत कर रहे हैं ताकि कोई भी पात्र मतदाता वंचित न रहे। हालांकि पार्टी के भीतर यह चिंता भी है कि शहरी और कुर्मी-ओबीसी वर्ग के मतदाता, जो भाजपा का कोर बेस माने जाते हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

विपक्ष ने बताया साजिश

वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया को साजिश करार दिया है। सपा नेताओं का कहना है कि लाखों असली मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जबकि उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी पूरे मामले की जांच की मांग की है।

नाम जुड़वाने का अब भी मौका

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावा और आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। पात्र मतदाता फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करा सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *