शहर की फिजाओं में फिर से गूंजेगी गौरैया की चहचहाहट

Press Release उत्तर प्रदेश

—– विश्व गौरैया दिवस पर नगर निगम का बड़ा अभियान, कृत्रिम घोंसलों से मिलेगा नया आशियाना

आगरा। कभी घर-आंगन की पहचान रही गौरैया अब शहरों से लगभग गायब होती जा रही है, लेकिन अब ताजनगरी में इसकी चहचहाहट फिर से सुनाई देने की उम्मीद जगी है। विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर आगरा नगर निगम ने गौरैया संरक्षण के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर कृत्रिम घोंसले लगाए जा रहे हैं और लोगों को इसके संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि गौरैया की घटती संख्या चिंता का विषय है और इसके पीछे तेजी से हो रहा शहरीकरण, पेड़ों की कमी और बदलता पर्यावरण प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि गौरैया हमारे पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा है। यह न केवल जैव विविधता को बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि कीट नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाती है। नगर निगम द्वारा शहरभर में भरे स्थानों और बगीचों में कृत्रिम घोंसले लगाए जा रहे हैं, ताकि गौरैयाओं को सुरक्षित आवास मिल सके और उनकी संख्या में वृद्धि हो सके।
उन्होंने आगे बताया कि यह अभियान केवल घोंसले लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संजय प्लेस, ताजगंज, कमला नगर, शाहगंज, बल्केश्वर, छावनी और ट्रांस यमुना कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों में पेड़ों और सुरक्षित स्थानों पर घोंसले लगाए गए हैं।
डॉ. सिंह के अनुसार, इस मुहिम में स्कूलों और सामाजिक संगठनों को भी सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि आम नागरिक छोटे-छोटे प्रयास करें, तो गौरैया को बचाना मुश्किल नहीं है।घर की छत, बालकनी या बगीचे में पानी और अनाज रखना, पेड़-पौधे लगाना और खुले स्थानों को संरक्षित करना जैसे कदम गौरैया के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि नगर निगम भविष्य में इस अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाने की योजना बना रहा है, जिससे अधिक से अधिक लोग इसमें जुड़ सकें और गौरैया संरक्षण एक जन आंदोलन का रूप ले सके।

वर्जन – नगर आयुक्त

नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने इस संबंध में कहा कि गौरैया का संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। नगर निगम द्वारा कृत्रिम घोंसले लगाने के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमें उम्मीद है कि नागरिकों के सहयोग से आगरा में एक बार फिर गौरैया की चहचहाहट सुनाई देगी और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।

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