आगरा, 30 मार्च। सब्जी के राजा आलू की आगरा मंडल ही नहीं बल्कि हमारे पूरे प्रदेश में बेकदरी हो रही है। आलू उत्पादक किसानों की हालत यह हो गयी है कि वे अपनी फसल को खेतों में ही जोतने तक को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में हम किसानों की आस सरकार से लगी है कि कुछ कोल्ड स्टोर के भाड़े में छूट मिल जाए तो हम किसान कुछ दिन अपने आलू को कोल्ड स्टोर में तो रख सकें। जिससे फसल की लागत तो निकल आए। इस आशय का एक ज्ञापन किसान नेताओं ने प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह को आज दिया।
बाजार मूल्य इन दिनों पांच से छह रुपये किलो है। जबकि आलू उत्पादन में लागत इससे कहीं अधिक 12 रुपये तक बैठ रही है। ऊपर से कोल्ज स्टोर का भाड़ा मनमाने तरीके से बढ़ता ही जा रहा है। ज्यादातर कोल्ड स्टोरों में भाड़ा मनमाने तरीके से वसूला जा रहा है। नो वेकैंसी के बोर्ड लगा दिये गये हैं। जिससे कि सामान्य किसान अपनी फसल को शीतगृह में रख भी नहीं पा रहा है। सरकार से मांग है कि किसानों को आलू भंडारण पर केसीसी ऋण दिलाया जाए। जिससे किसान मजदूरों का भुगतान तो कर सकें। कोल्ड स्टोर भाड़े की दरें स्थानीय स्तर पर तय न करके सरकार के स्तर से तय की जाएं। साथ ही सरकार द्वारा दी जा रही छूट का लाभ कोल्ड स्टोर स्वामियों को न देकर सीधे आलू उत्पादक किसानों को दिया जाए।
आलू उत्पादक किसानों की स्थिति इन दिनों बहुत ही दयनीय हो गयी है। वे आत्महत्या करने तक को मजबूर हो गये हैं। सरकार से विनती है कि हम आलू उत्पादक किसानों को बचाया जाए। अन्यथा वे आलू उत्पादन बंद करने को मजबूर हो जाएंगे। जिसका खामियाजा सरकार के साथ ही जनता को भी उठाना पड़ेगा।
आगरा मंडल में लगें आलू प्रसंस्करण इकाइयां
हम किसान मांग करते हैं कि आगरा मंडल जैसे बड़े आलू उत्पादक क्षेत्र में आलू प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित की जाएं। इसके अलावा किसानों को अपनी फसल देशभर में बेचने के लिए ट्रक, रेल और हवाई परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगरा का आलू कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक बेहतर दामों पर पहुंच सके। ज्ञापन देने वालों में आलू उत्पादक सेवा समिति के प्रदेश महासचिव लक्ष्मीनरायन बघेल के साथ किसान नेता श्याम सिंह चाहर, लाखन सिंह त्यागी, वीरेंद्र सिंह परिहार आदि रहे।


