मन की बात’ की 53 वीं कड़ी में प्रधानमंत्री का संबोधन

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24 Feb, 2019  पुनः पनः संशोधित

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार।‘मन की बात’ शुरू करते हुए आज मन भरा हुआ है। 10 दिन पूर्व, भारत-माता ने अपने वीर सपूतों को खो दिया। इन पराक्रमी वीरों ने हम सवा-सौ करोड़ भारतीयों की रक्षा में ख़ुद को खपा दिया। देशवासी चैन की नींद सो सकें, इसलिए, इन हमारे वीर सपूतों ने, रात-दिन एक करके रखा था। पुलवामा के आतंकी हमले में, वीर जवानों की शहादत के बाद देश-भर में लोगों को, और लोगों के मन में, आघात और आक्रोश है।शहीदों और उनके परिवारों के प्रति, चारों तरफ संवेदनाएँ उमड़ पड़ी हैं। इस आतंकी हिंसा के विरोध में, जो आवेग आपके और मेरे मन में है, वही भाव, हर देशवासी के अंतर्मन में है और मानवता में विश्वास करने वाले विश्व के भी मानवतावादी समुदायों में है। भारत-माता की रक्षा में,अपने प्राण न्योछावर करने वाले, देश के सभी वीर सपूतों को, मैं नमन करता हूँ।बिहार के भागलपुर के शहीद रतन ठाकुर के पिता रामनिरंजन जी ने,दुःख की इस घड़ी में भी जिस ज़ज्बे का परिचय दिया है, वह हम सबको प्रेरित करता है।उन्होंने कहा कि वे अपने दूसरे बेटे को भी दुश्मनों से लड़ने के लिए भेजेंगे और जरुरत पड़ी तो ख़ुद भी लड़ने जाएँगे। ओड़िशा के जगतसिंह पुर के शहीद प्रसन्ना साहू की पत्नी मीना जी के अदम्य साहस को पूरा देश सलाम कर रहा है। उन्होंने अपने इकलौते बेटे को भी CRPF join कराने का प्रण लिया है। जब तिरंगे में लिपटे शहीद विजय शोरेन का शव झारखण्ड के गुमला पहुँचा तो मासूम बेटे ने यही कहा कि मैं भी फौज़ में जाऊँगा।इस मासूम का जज़्बा आज भारतवर्ष के बच्चे-बच्चे की भावना को व्यक्त करता है।

हमने National War Memorial के निर्माण का निर्णय लिया और मुझे खुशी है कि यह स्मारक इतने कम समय में बनकर तैयार हो चुका है। दिल्ली के दिल यानि वो जगह, जहाँ पर इंडिया गेट और अमर जवान ज्योति मौजूद है बस उसके ठीक नज़दीक में, ये एक नया स्मारक बनाया गया है। मुझे विश्वास है ये देशवासियों के लिए राष्ट्रीय सैनिक स्मारक जाना किसी तीर्थ स्थल जाने के समान होगा। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है। स्मारक का डिजाईन,हमारे अमर सैनिकों के अदम्य साहस को प्रदर्शित करता है। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक का concept, Four Concentric Circlesयानी चार चक्रों पर केंद्रित है, जहाँ एक सैनिक के जन्म से लेकर शहादत तक की यात्रा का चित्रण है। मैं आशा करता हूँ कि आप राष्ट्रीय सैनिक स्मारक और National Police Memorial को देखने जरुर जायेंगे। आप जब भी जाएँ वहाँ ली गयी अपनी तस्वीरों को social media पर अवश्य share करें ताकि दूसरें लोगों को भी इससे प्रेरणा मिले और वे भी इस पवित्र स्थल, इस memorial को देखने के लिए उत्सुक हों।

मेरे प्यारे देशवासियो, ‘मन की बात’ के लिए आपके हजारों पत्र और comment, मुझे अलग-अलग माध्यमों से पढ़ने को मिलते रहते हैं। इस बार जब मैं आपके comment पढ़ रहा था तब मुझे ‘आतिश मुखोपाध्याय जी’ की एक बहुत ही रोचक टिप्पणी मेरे ध्यान में आई। उन्होंने लिखा है कि वर्ष 1900 में 3 मार्च को, अंग्रेजों ने बिरसा मुंडा को गिरफ्तार किया था तब उनकी उम्र सिर्फ 25 साल की थी ये संयोग ही है कि 3 मार्च को ही जमशेदजी टाटा की जयंती भी है। ‘मन की बात’ में ‘बिरसा मुंडा’ और ‘जमशेदजी टाटा’ को श्रद्दांजलि देने का एक प्रकार से झारखण्ड के गौरवशाली इतिहास और विरासत को नमन् करने जैसा है। आतिश जी मैं आपसे सहमत हूँ। इन दो महान विभूतियों ने झारखण्ड का नहीं पूरे देश का नाम बढ़ाया है। आज, अगर हमारे नौजवानों को मार्गदर्शन के लिए किसी प्रेरणादायी व्यक्तित्व की जरुरत है तो वह है भगवान‘बिरसा मुंडा’। अंग्रेजों ने छिप कर, बड़ी ही चालाकी से उन्हें उस वक़्त पकड़ा था जब वे सो रहे थे। क्या आप जानते हैं कि उन्होंने ऐसी कायरतापूर्ण कार्यवाही का सहारा क्यों लिया ? क्योंकि इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा करने वाले अंग्रेज भी उनसे भयभीत रहते थे। भगवान‘बिरसा मुंडा’ ने सिर्फ अपने पारंपरिक तीर-कमान से ही बंदूकों और तोपों से लैस अंग्रेजी शासन को हिलाकर रख दिया था। भगवान बिरसा मुंडा ने 25 वर्ष की अल्प आयु में ही अपना बलिदान दे दिया। बिरसा मुंडा जैसे भारत माँ के सपूत, देश के हर भाग में हुए है। अगर, भगवान ‘बिरसा मुंडा’ जैसे व्यक्तित्व ने हमें अपने अस्तित्व का बोध कराया तो जमशेदजी टाटा जैसी शख्सियत ने देश को बड़े-बड़े संस्थान दिए।

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी भाई देसाई का जन्म 29 फरवरी को हुआ था। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि यह दिन 4 वर्ष में एक बार ही आता है। सहज, शांतिपूर्ण व्यक्तित्व के धनी, मोरारजी भाई देश के सबसे अनुशासित नेताओं में से थे। स्वतंत्र भारत में संसद में सबसे अधिक बजट पेश करने का record मोरारजी भाई देसाई के ही नाम है। 1977 में जब जनता पार्टी चुनाव जीती तो वे देश के प्रधानमंत्री बने। उनके कार्यकाल के दौरान ही 44वाँ संविधान संशोधन लाया गया। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि emergency के दौरान जो 42वाँ संशोधन लाया गया था, जिसमें सुप्रीमकोर्टकी शक्तियों को कम करने और दूसरे ऐसे प्रावधान थे, जो हमारे लोकतान्त्रिक मूल्यों का हनन करते थे , उनको वापिस किया गया। जैसे 44वें संशोधन के जरिये संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही का समाचार पत्रों में प्रकाशन का प्रावधान किया गया। इसी के तहत, सुप्रीमकोर्ट की कुछ शक्तियों को बहाल किया गया पहली बार ऐसी व्यवस्था की गई कि मंत्रिमंडल की लिखित अनुशंसा पर ही राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा करेंगे, साथ ही यह भी तय किया गया कि आपातकाल की अवधि को एक बार में छः महीने से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है।

भाइयों-बहनों पिछले पाँच महीनों में लगभग बारह लाख ग़रीब परिवार PM जन आरोग्य योजना का लाभ उठा चुके हैं। मैंने पाया कि ग़रीब के जीवन में इससे कितना बड़ा परिवर्तन आ रहा है। आप सब भी यदि किसी भी ऐसे ग़रीब व्यक्ति को जानते है जो पैसों के अभाव में इलाज नहीं करा पा रहा हो। तो उसे इस योजना के बारे में अवश्य बताइये। यह योजना हर ऐसे ग़रीब व्यक्ति के लिए ही है।कुछ दिन पहले दिल्ली में ‘परीक्षा पे चर्चा’ का एक बहुत बड़ा आयोजन Town Hall के format में हुआ। इस Town Hall कार्यक्रम में मुझे technology के माध्यम से, देश-विदेश के करोड़ों students के साथ, उनके अभिभावकों के साथ, teachers के साथ, बात करने का अवसर मिला।

 

 

 

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