
एल एस बघेल, आगरा, 9 फरवरी। हैप्पी बर्थडे वालीबाल। यानीकि आज वालीबाल दिवस है। यह वही वालीबाल गेम है जो कि 131 साल की लंबी जर्नी (यात्रा) तय करता हुआ आज देश और दुनियां में जन-जन तक पहुंच चुका है। आज ही के दिन 9 फरवरी 1895 में वालीबाल खेल का जन्म हुआ था। इस खेल के जनक वायीएमसीए मशाच्यूसेट अमेरिकी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विलियम जी मोर्गन थे। यह खेल उनके लिये था, जो बास्केटबाल नहीं खेल पाते थे। उन्होंने इंडीवर हाल में एक रस्सी बांधकर बाल को ऊपर से थ्रो करने को कहा और दूसरी तरफ के लोगों को उसे कैच करने को कहा। इस तरह से इस खेल का जन्म हुआ।
उन्होंने इस खेल को मिंटोनिटी नाम दिया। जो कालांतर में वालीबाल के नाम से विख्यात हुआ। ऐसा इस खेल में बाल के वौली नेचर में ट्रेवल करने के कारण हुआ। आज यह खेल दुनिया के 305 देशों में खेला जाता है। फुटबाल के बाद यह दूसरा सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेल है। मैदान के नाम पर कम जगह घेरने के कारण यह खेल ग्रामीण इलाकों में बहुत अधिक लोकप्रिय है। यह खेल औलंपिक से लेकर विश्व कप, एशिया और राष्ट्रीय तथा राज्य से लेकर ग्रामीण स्तर तक खेला जा रहा है। भारत ही नहीं दुनियां के तमाम देशों में इसके फेडरेशन हैं। आगरा के जाने माने वालीबाल खिलाड़ी विजय कुमार वर्ष 1980 के दशक में आगरा में वालीबाल खेले हैं। श्री विजय कुमार एन सी वैदिक इंटर कालेज में पढ़े। इसके पश्चात नेशनल लेबल पर खेले। 1990 में विजय कुमार ने इंडिया कैंप किया था। 1995 में एनआईएस करने के पश्चात वालीबाल के कोच बने। यूपी के अलावा सेना के भी कोच थे। उनके साथ राकेश शर्मा, लक्ष्मन सिंह, अनिल राजपूत, अजय भदौरिया, बाह, यूपी एथलेटिक सचिव नरेंद्र कुमार भी आगरा में अस्सी के दशक में वालीबाल का झंडा उठाये हुए थे। आगरा में स्टेट चैंपियनशिप हुई थी वर्ष दो हजार में। आगरा में नेशनल लेबल के टूर्नामेंट भविष्य में कराये जाने की योजना बनायी जा रही है। जहां तक आगरा जनपद का सवाल है तो यहां बाह तहसील में वालीबाल खेल काफी लोकप्रिय है। यहां से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी निकले हैं।
