आगरा सदर में पकड़ा नकली विधायक , 18 दिन से होटल में मुफ्त ठहरा, बाजार से मुफ्त में सामान लिया

Crime Press Release उत्तर प्रदेश

आगरा के सदर में नकली विधायक पकड़ा गया, 18 दिन से होटल में मुफ्त ठहराव, बाजार से मुफ्त सामान

आगरा। सदर इलाके में एक युवक खुद को विधायक बताकर 18 दिनों से होटल में मुफ्त में ठहरे युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर आसपास के दुकानदारों से भी रसूखदारी दिखाते हुए सामान उठाने का आरोप है। कार पर राज्यसभा सांसद लिखवाकर दबदबा बनाए रखने वाला यह युवक विभिन्न व्यापारियों का जीना दुश्वार कर चुका था। इलाका पुलिस ने इसके बारे में शिकायत की अनदेखी की। मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और आरोपी को हिरासत में लिया गया है।

 

सदर क्षेत्र के होटल पवन में 29 अक्टूबर को दिल्ली नंबर की स्कॉर्पियो गाड़ी लेकर आए युवक ने खुद को विधायक विनोद कुमार बताते हुए कमरा लिया। कार पर ‘राज्यसभा सांसद’ लिखा हुआ था, जिससे होटल और आसपास के सामान्य लोग इससे प्रभावित हो गये। कमरे में प्रवेश लेने के बाद उसने पूरा उगाही का खेल शुरू कर दिया। कार इसी युवक के नाम है। विनोद कुमार के साथ उसका एक साथी भी था।

पिछले 18 दिन से फ्री में रहना, खाना, और रौब दिखाना, यही उसकी हरकतों की पहचान बन गया। होटल और आस-पास के रेस्टोरेंट से दिनभर खाने-पीने का सामान मुफ्त में मंगवाता रहा। दबाव बनाने के लिए यह तक कहता- मैं आगरा का विधायक हूं, कल से स्टेडियम में क्रिकेट खेलूंगा। मेरे लिए स्पेशल अरेंजमेंट कराओ।

इसे लगातार सामान देने के बाद होटल स्वामी और सदर बाजार के व्यापारी परेशान हो गए। सौदागर लाइन चौकी में शिकायत की गई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि आरोपी के ‘वीआईपी’ व्यवहार और गलत पहचान के दबाव में पुलिस भी मौन रही। चार दिन तक शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने से व्यापारी और अधिक परेशान हो उठे।

होटल स्वामी और अन्य व्यापारियों की व्यथा सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले में दखल दिया। एडीसीपी के निर्देश पर एसीपी सदर इमरान अहमद ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया।एसीपी इमरान अहमद ने बताया कि आरोपी युवक से पूछताछ के बाद साफ हो गया कि वह फर्जी तरीके से खुद को विधायक बता रहा था। उसकी पहचान और इरादों की जांच में मामला साफ होने पर पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज ही नहीं किया बल्कि उसे गिरफ्तार भी कर लिया।

आगरा की इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि कुछ लोग फर्जी पहचान और रसूख के दावे के बल पर किस तरह कानून का मजाक उड़ाते हैं। पुलिस की शुरुआती निष्क्रियता पर सवाल उठना लाजमी है। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद इस फ्रॊड की असलियत उजागर हो गई।

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